न्यूज मोहल्ला ब्यूरो/ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 19 सितंबर 2025 को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया, जिसके तहत H-1B वीज़ा शुल्क को बढ़ाकर $100,000 (लगभग ₹88 लाख) वार्षिक कर दिया गया है। यह शुल्क वृद्धि 21 सितंबर से लागू हो रही है और इसका सीधा असर भारतीय पेशेवरों और कंपनियों पर पड़ने की संभावना है।


भारत की प्रतिक्रिया

भारत सरकार ने इस कदम पर चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जयस्वाल ने कहा कि यह कदम "परिवारों के लिए मानवीय परिणाम" उत्पन्न कर सकता है और सरकार इस पर विचार कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिकी अधिकारी इन मुद्दों पर उचित समाधान निकालेंगे।

भारतीय आईटी उद्योग निकाय NASSCOM ने भी इस शुल्क वृद्धि को "गंभीर चिंता" का विषय बताया है, विशेषकर उन कंपनियों के लिए जो H-1B वीज़ा पर निर्भर हैं।


अमेरिकी कंपनियों की प्रतिक्रिया

अमेरिकी कंपनियां भी इस बदलाव से प्रभावित हो रही हैं। Meta, Microsoft, और JPMorgan जैसी कंपनियों ने अपने H-1B वीज़ा धारकों को 21 सितंबर से पहले अमेरिका लौटने की सलाह दी है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह शुल्क केवल नए वीज़ा आवेदनों पर लागू होगा, न कि नवीनीकरण पर।


कानूनी और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश कानूनी चुनौतियों का सामना कर सकता है, क्योंकि अमेरिकी कांग्रेस ने इस पर विचार नहीं किया है। कुछ आलोचकों का कहना है कि यह कदम अमेरिकी श्रमिकों के हित में नहीं है और इससे नवाचार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।


लब्बोलुआब...

H-1B वीज़ा शुल्क में यह वृद्धि भारतीय पेशेवरों और कंपनियों के लिए एक बड़ा झटका है। भारत सरकार और उद्योग निकाय इस पर विचार कर रहे हैं और अमेरिकी अधिकारियों से उचित समाधान की उम्मीद कर रहे हैं। यह मामला दोनों देशों के बीच संबंधों और वैश्विक पेशेवर गतिशीलता पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।