आज़ादी इसकी क़ीमत वही जानता है, जोकि कभी ग़ुलाम रहा हो।

हम भारतवासियों के लिए बेहद फख्र की बात है कि हम आजादी का 79 वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं, जैसा कि हम सभी जानते हैं अंग्रेजों से हमें आजादी हमारे बुज़ुर्गों की अनगिनत कुर्बानियों के नतीजे में मिली हैं, जहां हमारे बुज़ुर्गों ने अपनी जान तक देश की आज़ादी के लिए निछावर कर दी, जिसमें अनेक औरतों ने अपने सुहाग खोए अनेक मानों ने अपने बेटे खोए, अनेक बहनों ने अपने भाई खोए, अनेक बेटियों ने अपने बाप खोए।

लेकिन हमारे पूर्वज आज़ादी के अलावा किसी भी क़ीमत पर किसी भी समझौते के लिए तैयार ही नहीं हुए।

अब हमारी बारी है, कि हमें अपने पूर्वजों की कुर्बानियों को याद करते हुए, और इस आजादी नामक बेशकीमती धरोहर को पाकर, इसको सहेजकर रखना है।

इसलिए हमें खुद भी बेहतर बनना है, अपने आसपास लोगों को भी बेहतर बनाना है, अपने शहर को, अपने राज्य को, अपने देश को बेहतर बनाना है, ताकि सारी दुनिया में हमारा देश जिस सम्मान के साथ देखा जाता है, उस सम्मान में लगातार इज़ाफा होता रहे, और हम सारी संसार में बसने वाले लोगों की मदद करने वाले बन जाए, सारी दुनिया को शांति का पैगाम देने वाले बन जाए।

यही आपके चैनल न्यूज़ मोहल्ला की सारे देश और देशवासियों के लिए दुआ है।

मैं अपनी बात को इन पंक्तियों के साथ खत्म करना चाहूंगा;

हे काश के अब मिल ही जाए, इस "आज़ादी" पर आज़ादी।

नफ़रत, अशिक्षा, भ्रष्टाचार, अपराध, ज़ुल्म, बेरोज़गारी, ग़रीबी, भुखमरी से।

लेखन इमरान उज़ ज़माँ 
Email ID  imranuzzaman01@gmail.com 

#Happy Independence Day