भोपाल। रविवार रात भारत टॉकीज इलाके में लगी भयानक आग ने पूरे शहर को दहला दिया। यह आग उस जगह पर लगी जहां लकड़ी का कारोबार और आरा मशीनें चलती हैं। चश्मदीदों के मुताबिक आग इतनी तेज थी कि दमकल की 20 से ज़्यादा गाड़ियों को चार से पांच घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी, तब जाकर आग पर काबू पाया गया।

आग के दौरान हालात इतने खतरनाक थे कि सामने पेट्रोल टैंक और पीछे रेलवे ट्रैक पर डीज़ल ट्रेन गुजर रही थी। अगर आग थोड़ी और फैल जाती, तो शहर को एक बड़े हादसे का सामना करना पड़ सकता था।

जब मौके पर लोग और मीडिया पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि जिस जगह आग लगी, वहां केवल लकड़ी नहीं, बल्कि “AdBlue” नाम से भरी बाल्टियां और ड्रम रखे हुए थे। बताया जा रहा है कि यह रसायन ट्रकों और बड़े वाहनों के इंजन में प्रदूषण कम करने के लिए मिलाया जाने वाला यूरिया बेस्ड केमिकल होता है।

लेकिन सवाल यह उठता है कि -

लकड़ी के गोदाम और आरा मशीनों के बीच इतनी बड़ी मात्रा में यह केमिकल क्यों रखा गया था?

क्या यहां डुप्लीकेट या नकली AdBlue बनाने का काम चल रहा था?

और क्या यही केमिकल इस भयानक आग की असली वजह बना?


ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, आग बुझने के बाद जब टीम मौके पर पहुंची तो कई बाल्टियां और ड्रम ढककर ताले में बंद कर दिए गए थे, मानो कुछ छुपाने की कोशिश की जा रही हो।

क्षेत्रीय व्यापारियों का कहना है कि लकड़ी की आग में इतनी भयंकर लपटें पहले कभी नहीं देखी गईं, और यह तभी संभव है जब वहां रासायनिक पदार्थ मौजूद हो।

जानकारी यह भी मिली है कि यह ज़मीन पहले आरा मशीन संचालन के लिए थी, लेकिन बाद में चार हिस्सों में बांटकर कई लोगों को दी गई। इनमें से एक प्लॉट रेलवे ट्रैक के बिल्कुल पास है, जहां यह केमिकल स्टोर किया जा रहा था।

अब सवाल यही है कि लकड़ी के कारोबार की आड़ में आखिर यह यूरिया AdBlue जैसा केमिकल क्यों रखा गया था? क्या यह कोई अवैध निर्माण इकाई थी या छिपा हुआ गोदाम?

क्षेत्रीय नागरिकों और दुकानदारों ने मांग की है कि इस पूरी घटना की प्रॉपर जांच हो और जो भी जिम्मेदार हों, उन पर कठोर कार्रवाई की जाए, क्योंकि इस आग ने पूरे इलाके को विनाश के करीब पहुंचा दिया था।