बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और कॉमेडी के बादशाह गोवर्धन असरानी का 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने मुंबई के एक अस्पताल में रविवार रात अंतिम सांस ली। असरानी लंबे समय से श्वास संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निधन से हिंदी सिनेमा जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

असरानी ने पाँच दशकों से अधिक समय तक सिनेमा जगत में अपनी पहचान बनाए रखी। शोले के 'जेलर' से लेकर बावर्ची, छुपके छुपके और अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों जैसी दर्जनों फिल्मों में उनकी उपस्थिति दर्शकों को हंसाती रही।

 शुरुआती जीवन

गोवर्धन असरानी का जन्म 1 जनवरी 1941 को जयपुर (राजस्थान) में हुआ था। वे एक सिंधी हिंदू परिवार से थे। शुरुआती शिक्षा सेंट जेवियर्स स्कूल, जयपुर से हुई और आगे की पढ़ाई राजस्थान कॉलेज से पूरी की।
युवावस्था में उन्हें थिएटर और मिमिक्री का शौक था। 1964 में उन्होंने फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (FTII), पुणे से अभिनय की शिक्षा प्राप्त की। यही वह समय था जब असरानी ने अभिनय की दुनिया में कदम रखने का निर्णय लिया।

फिल्मी सफर

असरानी ने 1967 में फिल्म हरे कांच की चूड़ियां से हिंदी सिनेमा में कदम रखा। शुरुआती संघर्षों के बाद उन्होंने 1970 के दशक में अपनी कॉमेडी से पहचान बनाई।
फिल्म शोले (1975) में "हम अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर हैं" डायलॉग ने उन्हें अमर कर दिया।

उन्होंने 350 से अधिक हिंदी फिल्मों में अभिनय किया और साथ ही कई गुजराती फिल्मों में भी मुख्य भूमिका निभाई। असरानी ने चलो जीते हैं, बावर्ची, छुपके छुपके, चोटी बहू, आ अब लौट चलें, धमाल और भूल भुलैया जैसी फिल्मों में अपने अभिनय से दर्शकों को खूब हंसाया।


व्यक्तिगत जीवन

असरानी की शादी अभिनेत्री मंजू असरानी से हुई थी, जो स्वयं भी एक कलाकार रही हैं। दोनों ने कई स्टेज और फिल्म प्रोजेक्ट्स में साथ काम किया।
वे एक शांत और सादगीपूर्ण जीवन जीने के लिए जाने जाते थे।


सम्मान और योगदान

असरानी को उनकी शानदार हास्य प्रतिभा और भावपूर्ण अभिनय के लिए कई फिल्मफेयर अवॉर्ड्स मिले।
उनका योगदान न सिर्फ़ हिंदी सिनेमा बल्कि गुजराती और क्षेत्रीय फिल्मों के हास्य परंपरा में भी अहम माना जाता है।
उन्होंने बतौर निर्देशक और लेखक भी काम किया, जिससे उन्होंने भारतीय सिनेमा की जड़ों को मजबूत किया।


अंतिम समय और श्रद्धांजलि

असरानी का निधन 20 अक्टूबर 2025 को हुआ। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें सांस लेने में तकलीफ के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सोमवार सुबह उनका अंतिम संस्कार मुंबई में निजी समारोह में किया गया।

फिल्म जगत से अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, जॉनी लीवर, परेश रावल और अन्य कई कलाकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
अमिताभ बच्चन ने सोशल मीडिया पर लिखा

 "एक ऐसा कलाकार जिसने हर किरदार में जान डाल दी। असरानी जी, आपकी हंसी हमेशा अमर रहेगी।"


 “कॉमेडी का एक युग समाप्त हुआ”

हिंदी सिनेमा में असरानी सिर्फ एक अभिनेता नहीं बल्कि ‘हंसी के प्रतीक’ थे।
उनका जाना सिर्फ एक चेहरे का खोना नहीं, बल्कि उस दौर की समाप्ति है जिसने सिनेमा को सादगी और हंसी का रंग दिया।