जैसा कि आप सभी जानते हैं, हम अपने प्लेटफार्म के माध्यम से सामाजिक मुद्दों को जिनको आप और हम ज़रूरी समझते हैं, उन मुद्दों को सरकारों तक और संबंधित विभागों तक आपकी बात को पहुंचाते हैं, ऐसे ही एक मुद्दे के बारे में हमारे एक पाठक ने अवगत कराया, और हमको यह सजेशन दिया कि हमें इस मुद्दे को कवर करना चाहिए, क्योंकि यह मुद्दा मध्यम और निम्न वर्ग से जुड़ा हुआ है।

हमारा समाज प्रगतिशील है, और समय के साथ-साथ चीज़ों में बदलाव बल्कि संशोधन प्रगति का नियम है, जहां पुरानी चीज़ें पीछे छूट जाती हैं, और नई चीज़ों के साथ हम जुड़ते जाते हैं, और उनके साथ जीना सीख लेते हैं, समय के साथ नई-नई चीज़ों के आ जाने से, और आविष्कारों के होने से बाय चॉइस या बाय फोर्स हमें उनको अपनाना पड़ता है।

तो पिछले कुछ समय से जब से टेक्नोलॉजी हमारे बीच में आम हुई है, इस वजह से चीज़ें ऑटोमेशन की तरफ जा रही हैं, और जैसा कि हम सभी जानते हैं, कि सिम्पल से स्मार्ट बनने का सफर शुरू हुआ, और यह सिलसिला स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी, और अब स्मार्ट बिजली मीटर की तरफ रुख कर गया है, तो हम इस आर्टिकल में जिस विषय को कर करेंगे, वो स्मार्ट बिजली मीटर ही है।

सरकारों का यही कहना है कि जब आसानी मिल रही है तो वह भी उनके ऊपर से बर्डन काम करने के लिए और चीजों को अपडेट और अपग्रेड करने के लिए नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं जहां पर हम आम लोगों को भी आसानी हो सके और सरकारों को भी और संबंधित विभागों को भी।

इसके अलावा बिजली विभाग का ये कहना है, कि पुराने मीटर में बिजली चोरी करना बहुत आसान था, और लोग बड़ी मात्रा में इस बुनियादी सुविधा का दुरुपयोग कर रहे थे, इसलिए उन्हें स्मार्ट बिजली मीटर लगाने की ज़रूरत महसूस हुई, ताकि इससे बिजली चोरी को रोका जा सके।

बेशक कोई भी काम अगर सरकारो द्वारा और संबंधित विभागो द्वारा किया जाता है, तो बहुत सोच समझकर वो फैसला लिया जाता है, जिसका खास मकसद सभी को फायदा पहुंचाना होता है, क्योंकि ये एक ट्रांजैक्शन है, जिसमें दोनों पक्षों या जितने भी पक्ष इस काम में जुड़े हैं, उनका फायदा होना ज़रूरी है, किसी भी एक पक्ष की परेशानी या नुकसान को स्वीकार्य नहीं किया जा सकता है।

लेकिन शुरुआती दौर में स्मार्ट बिजली मीटर के संबंध में कुछ शिकायतें लगातार, उपभोक्ताओं द्वारा दर्ज की जा रही हैं, हालांकि जब भी कोई नई चीज़ व्यवहार में आती है, तो वह ट्रायल बेसिस पर होती है, कुछ वक़्त के बाद, और जब उसमें इस्तेमाल की वजह से परेशानियां आती हैं, तो संबधित विभाग भी उनमें सुधार करता है, और उपभोक्ता भी उसके इस्तेमाल के बारे में सीखते हैं।

लेकिन यहां पर जो परेशानी पेश आ रही है, वो उपभोक्ता जो नैतिक ज़िम्मेदारी के साथ एक सभ्य नागरिक बनकर, बिजली के बिल की अदायगी कर रहे थे, उनको कुछ परेशानियां बहुत विचलित कर रही है, और लोग इस वजह से बहुत लोग परेशान है, और जैसा कि आप सभी जानते हैं, न्यूज़ मोहल्ला चैनल हर समय जनता के बीच में रहता हैं, तो जनता हमें उनको जो परेशानियां पेश आती हैं, उनके बारे में बताती हैं, और जब हमने इस संबंध में गूगल किया तो हमें मुख्यतः यह परेशानियो के संबंध में जानकारी हासिल हुई;

स्मार्ट मीटर से जुड़ी मुख्य परेशानियाँ हैं, जैसे कि अधिक बिजली बिल आना, मीटर रीडिंग में गड़बड़ी, और ठीक से काम न करना. कुछ लोगों को यह भी शिकायत है कि स्मार्ट मीटर लगवाने के बाद बिजली बिल बहुत ज़्यादा आ रहा है, और उन्हें ठीक से जानकारी नहीं मिल पा रही है.

स्मार्ट मीटर से जुड़ी कुछ सामान्य परेशानियाँ:
अधिक बिजली बिल:
मीटर रीडिंग में गड़बड़ी:
कुछ लोगों को लगता है कि उनके स्मार्ट मीटर में रीडिंग गलत दिखाई जा रही है, जिससे बिल ज़्यादा आ रहा है.
स्मार्ट मीटर का ठीक से काम न करना:
नेटवर्क की समस्या:
प्रीपेड मीटर की समस्या:
(हालांकि अभी हमारे शहर में स्मार्ट मीटर पोस्टपेड ही है, प्रीपेड नहीं हुआ है, लेकिन फिर भी भविष्य में यह पोस्टपेड सेवा बंद हो जाएगी, और स्मार्ट बिजली मीटर प्रीपेड हो जाएगा)

कोविड-19 के बाद से सारी दुनिया में महंगाई बढ़ी है, लेकिन हमारे देश में महंगाई की दर काफी बढ़ गई है, और समाज में बेरोज़गारी भी आम होती जा रही है, इस पर बिजली का महंगा होना एक समस्या का विषय बन गया है, क्योंकि जब महंगाई बढ़ती है, तो उसका असर किसी एक चीज़ पर नहीं, बल्कि हर चीज़ पर पड़ता है।

तो अभी तक ऐसा होता था, कि अगर कोई व्यक्ति एक महीने बिल जमा नहीं कर पता था, तो दूसरे महीने में कर देते था, या तीसरे महीने में कर देता था, लेकिन अब ऐसा देखने में आ रहा है, कि जैसे ही एक लिमिट क्रॉस होती है, बिजली विभाग उनके ऑफिस से उस पार्टिकुलर घर की बिजली कट कर देता है, फिर इस व्यक्ति को बिजली विभाग जाना पड़ता है, जहां आने-जाने का खर्च और समय लगता है, फिर जब वह पैसे जमा कर देता है, तो उसके बाद भी कुछ घंटे के बाद बिजली वापस आती है, तब ये स्मार्ट बिजली मीटर की सुविधा असुविधा में तब्दील हो जाती है।

जैसा कि हमने ऊपर ज़िक्र किया, कि कोविड-19 के बाद से लोगों को घर चलाने में बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है, और ऐसे वक़्त में अगर स्मार्ट बिजली मीटर को प्रीपेड कर दिया जाएगा, तो वो परिवार जिनके पास उस समय वैसे नहीं है, वो अंधेरे में बैठे रहेंगे, मोहल्ले में उनके बारे में चर्चा होगी, उनके बच्चों की शिक्षा पर और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा कुल मिलाकर ये उनके लिए जगरूसाई का कारण बनेगा।

जैसा कि हम सभी जानते हैं, सोलर पैनल एक बेहतरीन विकल्प है, लेकिन वो अभी बहुत महंगा पड़ रहा है, अगर सरकार मध्यम वर्गीय और निम्न वर्गीय परिवारों के लिए एक स्कीम ले आए, जिसके तहत सोलर पैनल  को किस्तों में उपलब्ध करवा दे, तो इससे लोगों को काफी आसानी हो जाएगी, क्योंकि जितना अमाउंट वो हर महीने बिजली बिल में दे रहे हैं, अगर उतना ही अमाउंट उनसे हर महीने लिया जाए, तो ये कोशिश मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों के लिए एक बहुत बड़ा तोहफा होगी, क्योंकि हर किसी के पास एक मुश्त रकम नहीं होती, जिसका इस्तेमाल करके वो ये सुविधा हासिल कर सके।

सोलर पैनल के संबंध में गूगल पर यह जानकारी उपलब्ध है कि उसके क्या नुकसान हैं;

सौर ऊर्जा का प्राथमिक पर्यावरणीय प्रभाव फोटोवोल्टिक पैनलों के उत्पादन और स्थापना से संबंधित है, निर्माण प्रक्रिया में बड़ी मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होती है, और इससे वायु प्रदूषण होता है, जिसमें नाइट्रोजन ऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन, कार्बन मोनोऑक्साइड, सीसा और आर्सेनिक का उत्सर्जन शामिल है, सोलर पैनल स्थापना के लिए काफी मात्रा में भूमि की भी आवश्यकता होती है, जिसका उपयोग अन्यथा कृषि या प्राकृतिक उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।

सौर ऊर्जा से जुड़ा एक और पर्यावरणीय मुद्दा अपशिष्ट निपटान है, सोलर पैनल कई घटकों से बने होते हैं, जैसे सिलिकॉन वेफर्स, कांच की चादरें, प्लास्टिक और धातुएँ, जिन्हें पैनल के जीवनकाल (आमतौर पर 15-25 वर्ष) के अंत में निपटाना पड़ता है, इससे भारी मात्रा में ई-कचरा उत्पन्न होता है, जिसका सुरक्षित प्रबंधन आवश्यक है, ताकि मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को इन उत्पादों में मौजूद सीसा या कैडमियम जैसे खतरनाक पदार्थों से होने वाले प्रदूषण से बचाया जा सके।

अब हम अपने आर्टिकल को थोड़े मज़ाकिया अंदाज़ में क्लोज़ करेंगे, जैसा कि हम सभी जानते हैं, हमारी भोपाली जुगतें सारी दुनिया में मशहूर है, तो उनमें से चंद आपके सामने पेश ऐ ख़िदमत हैं।

भोपाली जुगतें;

अरे खां स्मार्ट बिजली मीटर तो बुलेट ट्रेन से भी तेजज चल रिया है।

भाई साहब मैं क्या बताऊं स्मार्ट मीटर मैंने अपनी बाइक पर लगा लिया था, मियां रॉकेट बन गई। 

सुनों खां पठान अगर स्मार्ट मीटर को मेट्रो के ब्रिज पर लगा दें, तो रातों-रात ब्रिज तैयार हो जाएगा।

रुपए के आगे स्मार्ट मीटर को लगा दो, तो भाई मियां अपना रुपया डॉलर को पीछे छोड़ देगा।

धन्यवाद 

लेखक इमरान उज़ ज़माँ 
ई-मेल imranuzzaman01@gmail.com