भोपाल, 11 सितंबर।
आरिफ नगर गेट नंबर-2 पर गणेश विसर्जन जुलूस में हुआ कथित पथराव अब राजनीति और मोहल्ले की गली-गली में चर्चा का मुद्दा बन चुका है। अदालत में गवाह के बयान ने सबको हैरान कर दिया और नेताओं की बयानबाज़ी ने आग में घी डालने का काम कर दिया।
गवाह ने कोर्ट में पलटा बयान
समिति अध्यक्ष, जिन पर पुलिस ने पूरा केस टिका रखा था, ने जज साहब के सामने कहा -
“मैंने अपनी आंखों से किसी को पत्थर फेंकते नहीं देखा। नाम तो भीड़ से सुने थे, मैं इनमें से किसी को पहचानता तक नहीं।”
बस, ये बयान आते ही पूरा केस हिल गया।
मामला असल में क्या है?
सोमवार शाम जुलूस जैसे ही आरिफ नगर से गुज़रा, अचानक पत्थर चलने की खबर फैली। मूर्ति खंडित हो गई।
लेकिन जांच में सामने आया कि फरियादी चरण सिंह कुशवाहा और आरोपी अब्दुल हलीम के बीच पहले से झगड़ा चल रहा था।
लोग अब पूछ रहे हैं—“ये सच में पथराव था या फिर पुरानी दुश्मनी का हिसाब बराबर करने की कोशिश?”
नेताओं की ज़हरीली एंट्री
घटना के बाद कुछ नेता मौके पर पहुँचे। किसी ने माइक पर गरजते हुए कहा —
“ये सुनियोजित हमला है, बर्दाश्त नहीं करेंगे!”
तो दूसरे नेता ने इसे सीधे हिंदू-मुस्लिम मुद्दा बना दिया। अपशब्द बोले गए, माहौल गरमा गया और राजनीति अपनी दुकान सजाने लगी।
मोहल्ले में चर्चा
गली-गली में अब यही चर्चा है —
“त्योहार में साज़िश करके माहौल बिगाड़ा जा रहा है।”
“नेताओं को शांति की बात करनी चाहिए थी, लेकिन सबने आग ही लगाई।”
“हम मोहल्ले वाले तो मिल-जुलकर त्योहार मनाना चाहते हैं, ये राजनीति वाले ही फूट डाल रहे हैं।”
पुलिस की सख्ती
मामला तूल पकड़ते देख पुलिस ने फोर्स बढ़ा दी है। अफसरों ने कहा है कि CCTV और गवाहों के आधार पर ही सच सामने लाया जाएगा। दबाव चाहे किसी का भी हो, माहौल बिगाड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।