न्यूज मोहल्ला नई दिल्ली।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में संगठनात्मक नेतृत्व परिवर्तन को लेकर हलचल तेज़ हो गई है। जे.पी. नड्डा का कार्यकाल समाप्ति की ओर है और पार्टी में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश जारी है। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव और आने वाले राज्यों की रणनीति को देखते हुए यह फैसला भाजपा के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है।

पार्टी के भीतर और आरएसएस खेमे में चल रही चर्चाओं के बीच तीन नाम सबसे मज़बूत दावेदारों के रूप में उभरकर सामने आए हैं—धर्मेंद्र प्रधान, भूपेंद्र यादव और शिवराज सिंह चौहान ।


धर्मेंद्र प्रधानसंगठन और समीकरण का संतुलित चेहरा

धर्मेंद्र प्रधान को इस दौड़ का सबसे मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है।

ओडिशा से आने वाले प्रधान भाजपा और आरएसएस दोनों से लंबे समय से जुड़े रहे हैं।

उन्होंने उज्ज्वला योजना और नई शिक्षा नीति जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक लागू किया।

वे ओबीसी समुदाय से आते हैं, जिससे उन्हें बिहार और हिंदी पट्टी के राज्यों में अतिरिक्त बढ़त मिल सकती है।

मोदी और शाह दोनों के साथ उनके समीकरण बेहद मजबूत माने जाते हैं।


भूपेंद्र यादव – रणनीति के मास्टर और संगठन के चाणक्य

भूपेंद्र यादव को भाजपा का “बैक-रूम स्ट्रैटेजिस्ट” कहा जाता है।

पेशे से वकील रहे यादव ने भाजपा संगठन में तेजी से जगह बनाई।

2014 और 2019 लोकसभा चुनावों में उनकी रणनीति का बड़ा योगदान रहा।

वे कई राज्यों में चुनाव प्रभारी रहे और हमेशा बैकएंड से चुनावी मैनेजमेंट करने के लिए पहचाने जाते हैं।

ओबीसी पृष्ठभूमि और मोदी-शाह की टीम में भरोसेमंद चेहरे के तौर पर वे मजबूत दावेदार हैं।


शिवराज सिंह चौहान – जनप्रिय चेहरा और किसान-हितैषी छवि

शिवराज सिंह चौहान भाजपा के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं।

लगभग 18 साल तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और जनता के बीच “मामा” के नाम से मशहूर हैं।

वर्तमान में वे केंद्रीय कृषि मंत्री हैं और किसानों के बीच उनकी गहरी पकड़ है।

वे भी ओबीसी समुदाय से आते हैं, जिससे भाजपा के जातीय समीकरण में फिट बैठते हैं।

हालांकि संगठनात्मक रणनीति में उनकी पकड़ प्रधान और यादव जितनी मजबूत नहीं मानी जाती।


तुलना: कौन कहाँ आगे?

नेता सबसे बड़ी ताकत चुनौती

धर्मेंद्र प्रधान संगठनात्मक अनुभव, ओबीसी समीकरण, शीर्ष नेतृत्व का भरोसा लगातार चुनावी जीत की चुनौती

भूपेंद्र यादव चुनावी रणनीति और संगठनात्मक मैनेजमेंट जनप्रिय चेहरा न होना

शिवराज सिंह चौहान जनप्रिय और किसान-हितैषी छवि संगठनात्मक रणनीति में कमी



निष्कर्ष

भाजपा का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा, इस पर अंतिम फैसला शीर्ष नेतृत्व और आरएसएस पर निर्भर करेगा।

अगर पार्टी को संतुलित संगठनात्मक चेहरा चाहिए, तो धर्मेंद्र प्रधान सबसे आगे हैं।

अगर रणनीतिकार अध्यक्ष की तलाश है, तो भूपेंद्र यादव मजबूत दावेदार हैं।

और अगर भाजपा जनप्रिय और किसान-हितैषी चेहरा चाहती है, तो शिवराज सिंह चौहान सबसे बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं।


अभी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भाजपा 2025 के चुनावी समीकरण को ध्यान में रखते हुए किसे कमान सौंपती है।

    न्यूज मोहल्ला प्रधान संपादक 
             फैजुद्दीन खान 
(9301363785/7999357775)