न्यूज मोहल्ला/लखनऊ/रामपुर, 23 सितम्बर 2025।
समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और रामपुर से पूर्व सांसद आज़म खान मंगलवार को सीतापुर जेल से रिहा हो गए। लगभग 23 महीने जेल में रहने के बाद उनकी रिहाई ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
कैसे हुई रिहाई
रामपुर की अदालत से सोमवार को रिहाई का आदेश आने के बाद मंगलवार सुबह सीतापुर जेल प्रशासन ने आज़म खान को बाहर जाने की अनुमति दी। रिहाई के वक्त उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म और अदीब आज़म मौजूद थे।
जेल के बाहर माहौल
आज़म खान की रिहाई की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में समर्थक सीतापुर जेल के बाहर पहुँच गए। कई कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़े बजाए और नारेबाजी की। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त बल तैनात किया और ट्रैफिक नियंत्रित करने के लिए कुछ वाहनों का चालान भी किया।
मुकदमों की स्थिति
आज़म खान पर अब भी 104 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। इनमें ज़मीन कब्ज़ा, फर्जी कागज़ात, भड़काऊ भाषण और अन्य आपराधिक आरोप शामिल हैं। कुछ मामलों में उन्हें अदालत से सज़ा मिली, तो कई मामलों में ज़मानत पर रिहाई मिली है। अदालतों ने कुछ मुकदमों को निरस्त भी किया है।
राजनीतिक अटकलें
उनकी रिहाई के बाद यह चर्चा ज़ोर पकड़ रही है कि आज़म खान समाजवादी पार्टी से अलग होकर बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) में शामिल हो सकते हैं। हालांकि इस पर पूछे जाने पर उन्होंने केवल इतना कहा – “अटकलें लगाने वालों से ही पूछिए।”
सपा की प्रतिक्रिया
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आज़म खान की रिहाई पर स्वागत करते हुए कहा कि उनकी सरकार बनने पर सभी “झूठे मुकदमे” वापस लिए जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने राजनीतिक बदले की भावना से आज़म खान को निशाना बनाया था।
आगे क्या?
आज़म खान की रिहाई से सपा की अंदरूनी राजनीति और मुस्लिम वोट बैंक की रणनीति पर असर पड़ सकता है। बीएसपी में उनके शामिल होने की संभावनाएँ यदि सच होती हैं तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।