न्यूज़ मोहल्ला विशेष रिपोर्ट
कानपुर | 18 सितम्बर 2025
कानपुर के थाना रावतपुर क्षेत्र में बारावफात के मौके पर मुस्लिम समुदाय द्वारा लगाई गई सजावट ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। मोहल्ला सय्यद नगर में बने गेट पर “I LOVE MOHAMMAD” लिखे लाइट बोर्ड और तंबू लगाने को लेकर स्थानीय हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताई और इसे नई परंपरा कहकर हटाने की मांग की।
विवाद कैसे शुरू हुआ?
4 सितम्बर की रात बारावफात की तैयारियों के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवकों ने गली के बाहर गेट पर लाइट बोर्ड लगाया। इस पर “I LOVE MOHAMMAD” लिखा था। हिंदू पक्ष का कहना था कि यह जगह हर साल राम नवमी के जुलूस का पारंपरिक मार्ग है और इस तरह की नई सजावट से सांप्रदायिक तनाव पैदा हो सकता है।
पुलिस की कार्रवाई
सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुँचे और दोनों पक्षों से बात की। लेकिन सहमति न बनने पर बोर्ड और तंबू हटवा दिया गया। पुलिस ने 9 नामज़द और 15-16 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज कर दी। आरोपियों पर शांति भंग करने, अवैध जमावड़ा और धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने जैसी धाराएँ लगाई गई हैं।
CCTV और वीडियो फुटेज से जाँच
पुलिस ने इलाके की CCTV रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को सबूत मानकर जाँच शुरू की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौके पर नारेबाज़ी और पोस्टर फाड़ने की घटनाएँ भी हुईं।
राजनीतिक और धार्मिक बयान
वर्ल्ड सूफी फोरम के अध्यक्ष हज़रत सैयद मोहम्मद अशरफ किछौछवी ने FIR की निंदा की। उनका कहना है — “पैग़ंबर से मोहब्बत दिखाना कोई अपराध नहीं है। यह संविधान द्वारा दी गई धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ है।”
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी बयान दिया कि “I LOVE MOHAMMAD लिखना सांप्रदायिक उकसावा नहीं बल्कि धार्मिक आस्था का प्रतीक है।”
वहीं हिंदू संगठनों का कहना है कि “नई परंपरा” लागू करने से बचना चाहिए ताकि पुराने धार्मिक जुलूस मार्ग पर टकराव न हो।
माहौल तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में
हालाँकि घटना के बाद कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण रहा, लेकिन भारी पुलिस बल तैनात कर स्थिति को नियंत्रण में ले लिया गया। पुलिस का कहना है कि शांति व्यवस्था भंग करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
सोशल मीडिया पर गर्म बहस
घटना के बाद यह खबर सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गई है। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर कई मुस्लिम युवाओं ने अपने प्रोफ़ाइल नाम या स्टेटस में “I LOVE MOHAMMAD” जोड़ लिया है। वहीं व्हाट्सएप ग्रुप्स में इस पर लंबी बहस छिड़ी हुई है।
कई लोगों का कहना है कि पैग़ंबर मोहम्मद ﷺ से प्रेम ईमान का हिस्सा है और इसे व्यक्त करना स्वाभाविक है। कुछ लोग इसे भावनाओं की अभिव्यक्ति बताते हुए प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं, तो कुछ इसे साम्प्रदायिक सौहार्द को बचाने के लिए ज़रूरी कदम मानते हैं।
न्यूज़ मोहल्ला की राय
यह मामला सिर्फ एक बोर्ड लगाने या हटाने भर का नहीं, बल्कि धार्मिक आस्थाओं और “नई परंपरा” को लेकर उपजे अविश्वास का है। अब सोशल मीडिया ने इसे और व्यापक बना दिया है, जिससे बहस गली-मुहल्लों से निकलकर देशभर के लोगों तक पहुँच गई है। प्रशासन के लिए चुनौती है कि कानून व्यवस्था और साम्प्रदायिक सौहार्द - दोनों के बीच संतुलन बनाए रखा जाए।