भोपाल, न्यूज़ मोहल्ला।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हर साल होने वाला आलमी तब्लीगी इज्तिमा न सिर्फ़ एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह दुनिया भर में अपनी सादगी, सेवा भाव और अनुशासन के लिए जाना जाता है। बीते 78 वर्षों से यह आयोजन निरंतर होता आया है, और अब तक किसी भी वर्ष कोई बड़ी दुर्घटना, विवाद या अनुचित गतिविधि की सूचना नहीं मिली। इसके बावजूद, पिछले कुछ वर्षों से, खासकर कोविड के बाद, इस आयोजन को लेकर मीडिया के कुछ वर्गों और राजनीतिक हलकों में भ्रांतियाँ फैलती रही हैं।
कभी यह कहा जाता है कि “पाकिस्तान से जमात आ रही है”, तो कभी टीवी डिबेट्स में इज्तिमा ग्राउंड में लगने वाली दुकानों को लेकर सवाल उठाए जाते हैं। इस तरह की चर्चाएँ बिना तथ्यों के हवा में तीर चलाने जैसी हैं, जिनका मकसद केवल भ्रम फैलाना मालूम होता है।
ग्राउंड रिपोर्ट: ‘यह व्यापार नहीं, सेवा है’
जब न्यूज़ मोहल्ला की टीम ने ग्राउंड ज़ीरो पर पहुँचकर हालात का जायज़ा लिया, तो तस्वीर बिल्कुल अलग दिखी।
इज्तिमा स्थल पर मौजूद मीडिया कोऑर्डिनेटर, व्यापारियों और स्वयंसेवकों से बातचीत में यह स्पष्ट हुआ कि यहाँ होने वाला आर्थिक लेनदेन किसी भी मायने में लाभ के लिए नहीं, बल्कि सेवा के भाव से किया जाता है।
एक दुकानदार ने बताया -
“हम जो सामान यहाँ बेचते हैं, उसमें दो-तीन प्रतिशत से ज़्यादा मार्जिन नहीं होता। कई बार तो हम बिना कोई मुनाफ़ा लिए सिर्फ़ सेवा के लिए सामान बेचते हैं। अगर ₹100 लगते हैं तो घर ₹80 ही लेकर जाते हैं - क्योंकि हमारा मकसद कमाई नहीं, सेवा है।”
वहीं, कई लोगों ने बताया कि यहाँ बिकने वाली वस्तुएँ बाज़ार के मुकाबले काफ़ी सस्ती होती हैं।
“जो चीज़ बाहर ₹100 की मिलती है, वह यहाँ ₹25 या ₹30 में भी मिल जाती है। क्योंकि यह व्यावसायिक मेला नहीं है - यह धार्मिक आयोजन है।”
सद्भाव का संदेश
इज्तिमा में सेवा करने वालों का कहना है कि यहाँ किसी धर्म या संप्रदाय की सीमा नहीं है।
“अगर कोई भी धर्म का व्यक्ति सेवा करना चाहता है, तो उसका स्वागत है। यहाँ कोई रोक-टोक नहीं है, क्योंकि यह आयोजन ‘कमाई’ नहीं, ‘खिदमत’ (सेवा) के लिए है।”
अफवाहों से सावधान रहने की ज़रूरत
दरअसल, सोशल मीडिया और कुछ समाचार चैनलों पर इस आयोजन को लेकर फैल रही भ्रामक सूचनाएँ समाज में संदेह का माहौल बना रही हैं। जबकि ज़मीनी हक़ीक़त यह है कि इज्तिमा न केवल सामाजिक एकता और सद्भावना का उदाहरण है, बल्कि यह भोपाल की पहचान और परंपरा का हिस्सा बन चुका है।
लब्बोलुआब : इज्तिमा, एकता और अनुशासन की मिसाल
78 वर्षों की परंपरा में यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि सेवा और समर्पण से ही समाज जुड़ता है, विभाजन से नहीं।
भोपाल का आलमी तब्लीगी इज्तिमा सिर्फ़ एक धार्मिक सम्मेलन नहीं, बल्कि यह इंसानियत, भाईचारे और सामाजिक संतुलन का जीवंत प्रतीक है - जिसे अफवाहों की आग में झोंकने की जगह सच्चाई की रोशनी में समझने की ज़रूरत है।
रिपोर्ट: फैजुद्दीन खान, न्यूज़ मोहल्ला टीम, भोपाल
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