आज बात एक ऐसे महत्वपूर्ण विभाग के संबंध में जो विभाग हम रहवासियों के लिए एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी को पूरा करता है, जिस पर सारे शहर की साफ़ सफ़ाई की ज़िम्मेदारी है।
जी हां वह विभाग है, नगर निगम विभाग यह विभाग हम रहवासियों के द्वारा, जो गंदगी की जाती है, उसकी सफाई कर, पूरे शहर को गंदगी मुक्त करता है, क्योंकि एक साफ सुथरा माहौल हमें ऊर्जा से भरता है, इसके विपरीत गंदा माहौल हमारी ऊर्जा को काम करता है।
सफाई अपनाओं, बीमारी भगाओं अभियान
प्रदेश की नगरीय निकार्या में सफाई अपनाओ, बीमारी भगाओं" राष्ट्रव्यापी अभियान अंतर्गत जल जनित एवं वैक्टर जनित संक्रामक बीमारियों की रोकथाम / बचाव हेतु निकाय स्तर पर निरंतर संचालित समग्र स्वच्छता एवं स्वास्थ्य पर आधारित विशेष अभियान जुलाई माह में आयोजन किया जाएगा। इस अभियान के अंतर्गत प्रमुख गतिविधियां निम्नानुसार होगीः-
नगरीय क्षेत्रों के समस्त जीव्हीपी का चिन्हांकन, सफाई एवं सौंदर्याकरण।
समस्त सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालयों की नियमित सफाई एवं रखरखाव हेतु विशेष अभियान।
पेयजल की गुणवत्ता परीक्षण और सैंपल की जांच उपरांत आपूर्ति।
अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों को चिन्हित कर तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित करना।
अंतर-विभागीय समन्वय और मॉनिटरिंग सुनिश्चित करना।
निकाय स्तर पर कचरे का दैनिक पृथक्कीकरण, संग्रहण और परिवहन।
आंगनवाड़ी केंद्रो और स्कूलों में छात्र-छात्रों द्वारा स्वच्छता अभियान और स्वच्छता व स्वास्थ्य पर केंद्रीत चर्चा।
सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति और जल इकाइयों जैसे पानी की टंकी, पाइपलाईन, ट्रीटमेंट प्लांट आदि का रखरखाव ।
पीपीटी (प्रोटेक्ट प्रिवेंट व ट्रीट) रणनीति बीमारी से बचाव, रोकने, उपचार रणनीति को अपनाना।
गृहभेंट के माध्यम से नागरिकों को अपने घरों एवं आसपास स्वच्छता बनाए रखने और घरों व सार्वजनिक स्थानों पर जलभराव रोकने हेतु जागरूकता।
दिनांक: 1 जुलाई 2025 से 07 जुलाई 2025 तक
"स्वच्छ हाथ अभियान"
गतिविधियों का विवरण: स्कूलों में हाथ धोने व व्यक्तिगत स्वच्छता पर छात्रों के बीच चर्चाका आयोजन।
हाथ धोने के तरीकों का प्रचार प्रसार व अशासकीय संगठनों के सहयोगियों द्वारा डेमो का आयोजन करना।
अभियान के अंतर्गत सफाई मित्रों का हाथ धोने पर प्रशिक्षण व कार्यशाला का आयोजन।
संस्थाएं/ क्रियान्वयन हेतु एजेंसी: स्वच्छता एम्बेसडर समूह, यूनिसेफ, स्कूल.
हर साल 15 अक्टूबर को ग्लोबल हैंड वॉशिंग डे (Global Handwashing Day 2024) मनाया जाता है।
क्योंकि हम इंसानों के गंदे हाथों के द्वारा, हमारे मुंह से होकर पेट तक अनगिनत बीमारियां फैलती हैं, जिसकी वजह से हम लोग बार-बार बीमार पड़ते हैं।
हमें यह बात अच्छी तरह याद होगी, कि जब हम छोटे थे, तब हमारे परिवार वाले खाने से पहले हमारे हाथ धुलवाते थे, और खाने के बाद भी हाथ धुलवाते थे, हम कहीं से जब वापस घर आते थे, तब हाथ धुलवाए जाते थे, हमको अपने हाथों को मुंह में लेने के लिए मना किया जाता था, क्योंकि इससे बहुत सारे जरासिम हमारे पेट में पहुंच जाते हैं।
हम बचपन में जिस तरह के माहौल में रहते हैं, वही अच्छी या बुरी आदतें हमारे साथ बढ़ती जाती हैं, इसलिए हमारे परिवार वाले बचपन से जब मिट्टी नरम होती है, तो हमें अच्छे संस्कार और आदतें देते हैं, ताकि बड़े होकर भी हम उन पर अमल कर सकें, वरना जब मिट्टी सख्त हो जाती है, तो लाख कोशिशों के बावजूद भी वह मनचाहा आकार नहीं ले पाती।
क्योंकि यह सख्त हैरानी की बात है, कि 15 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ग्लोबल हैंडवाशिंग डे मनाया जाता है।
इसी के तहत नगर निगम को अगर एक अभियान चला कर लोगों को यह बताना पड़े, कि अगर आप हाथ नहीं धोएंगे, तो उसके कितने नुकसान भुगतने पड़ेंगे, क्योंकि यह बहुत आम बात है, लेकिन आम बातों के संबंध में यह कहा जाता है, कि इस पर ख़ास लोग ही अमल करते हैं, आम लोग अमल नहीं करते, क्योंकि अगर सभी लोग इन बातों में अमल कर रहे होते, तो हमारा समाज बुनियादी चीज़ों के लिए स्ट्रगल नहीं कर रहा होता।
खैर जो भी हो हम नगर निगम के आभारी हैं, कि वह कम से कम लोगों को जागरुक कर रहा है, और कब किसके दिल में कोई बात उतर जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता है, इसलिए मिट्टी को नरम करने के लिए हमें पानी डालते रहना चाहिए, इंग्लिश में एक बड़ी अच्छी कहावत है।
"The Grass Is Greener Where You Water It"
आइए अब हम जानते हैं, कि हाथ नहीं धोने से क्या नुकसान होते हैं;
बिना हाथ धोए खाने से या किसी भी चीज को छूने से कीटाणु शरीर में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे कई बीमारियाँ हो सकती हैं।
हाथ न धोने के कुछ नुकसान इस प्रकार हैं:
बीमारियाँ:
कीटाणु हाथों के माध्यम से शरीर में प्रवेश करके दस्त, उल्टी, पेट दर्द, सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियाँ पैदा कर सकते हैं.
संक्रमण:
बिना हाथ धोए खाना खाने से या किसी भी चीज को छूने से कीटाणु एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है.
त्वचा संक्रमण:
बार-बार हाथ धोने से या बिना हाथ धोए त्वचा को छूने से त्वचा संक्रमण हो सकता है.
पेट खराब होना:
कीटाणु पेट में जाकर पेट खराब कर सकते हैं, जिससे उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
अन्य बीमारियाँ:
कीटाणु शरीर में प्रवेश करके कई अन्य बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
इसलिए, स्वस्थ रहने के लिए, खाने से पहले और बाद में, और किसी भी गंदी चीज को छूने के बाद हाथ धोना बहुत ज़रूरी है।
इसलिए हाथों को अच्छी तरह से धोना और साफ रखना स्वच्छता की ओर पहला कदम माना जाता है, हाथ धोने से आप खुद को साफ रखते हैं, और शरीर को कई खतरनाक बीमारियों से दूर रख सकते हैं, हाथ धोने से आप सिर्फ खुद ही नहीं, बल्कि दूसरे लोगों को भी बीमार और संक्रमित होने से बचा सकते हैं।
यही वजह है, कि घर हो या स्कूल बच्चों को हर जगह हाथ धोने और बेसिक हाइजीन बरतने के बारे में सिखाया जाता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं, कि आखिर बार-बार हाथ धोने के लिए ही क्यों कहा जाता है, इसके पीछे के कई कारण है।
ऐसा इसलिए कहा जाता है, क्योंकि हाथों में कई ऐसे छोटे जर्म्स छुपे होते हैं, जो सीधे हमारे शरीर के अंदर जा सकते हैं, इससे शरीर बड़ी-बड़ी बीमारियों का घर बन सकता है।
खासतौर से जब हम किसी बाजार, भीड़वाली जगह या पार्टी से आए होते हैं, तो हमारे हाथ बहुत सारे जर्म्स को अपने साथ ले आते हैं।
इससे बीमार होने और इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
वैसे कोरोना काल में लोगों ने हाथ धोने और उसके महत्व के बारे में अच्छी तरह से समझ लिया है, लेकिन जैसे ही कोरोना का कहर कम हुआ है, लोगों ने फिर से लापरवाही बरतना शुरू कर दिया है।
एक रिसर्च की मानें तो अगर सभी लोग ठीक से हाथ धोएं तो इससे हर साल 10 लाख लोगों की जान बचाई जा सकती है।
कब-कब हाथ धोने चाहिए?
खाना बनाने से पहले और
खाना खाने से पहले और बाद में,
जानवरों को छूने के तुरंत बाद,
खांसने और छींकने के बाद,
बाहर से आने के बाद,
खेल कर आने के बाद,
किसी से हाथ मिलाने के बाद,
बाथरूम के इस्तेमाल के बाद,
सफर से आने के बाद,
इस संबंध में एक ज़रूरी बात:
यहां पर इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए, कि हमें साफ सफाई को एक बीमारी के रूप में नहीं अपनाना चाहिए, क्योंकि सफाई के डर को माइसोफोबिया (Mysophobia) या जर्मोफोबिया (Germophobia) कहा जाता है।
यह एक प्रकार का विशिष्ट भय है, जिसमें व्यक्ति को कीटाणुओं, गंदगी, या संदूषण का अत्यधिक और तर्कहीन डर होता है।
विस्तार में:
माइसोफोबिया/जर्मोफोबिया:
यह एक ऐसा डर है जो कीटाणुओं, गंदगी, या संदूषण के संपर्क में आने के विचार से जुड़ा होता है।
लक्षण:
माइसोफोबिया से पीड़ित व्यक्ति को बार-बार हाथ धोने, सफाई करने, या कीटाणुओं के डर से बचने के लिए विशेष अनुष्ठान करने की आवश्यकता महसूस हो सकती है।
अन्य नाम:
इसे "सफाई का डर" या "जर्म्स का डर" भी कहा जाता है।
ओसीडी से संबंध:
माइसोफोबिया अक्सर ऑब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) के साथ जुड़ा होता है, जिसमें व्यक्ति को बार-बार कुछ करने की तीव्र इच्छा होती है।
उपचार:
माइसोफोबिया का उपचार चिकित्सा, दवा, या दोनों के संयोजन से किया जा सकता है।
इसलिए हमें बीच का रास्ता अपनाना चाहिए, ना एकदम लापरवाही करनी चाहिए, ना एकदम चीज़ों को नजरअंदाज़ करना चाहिए, क्योंकि दोनों ही हालतों में हमारा ही नुकसान होता है।