गुस्ताख़ी माफ़...
आज हम आप सभी के सामान्य ज्ञान की परीक्षा लेंगे, और यह आर्टिकल पूरी ही तरह से व्यंग्यात्मक होगा।
हालांकि हम जिस विषय को इस आर्टिकल में कर करेंगे, वो लोग जो इस तकलीफ को बर्दाश्त कर रहे हैं, उनके लिए बिल्कुल भी व्यंग्यात्मक नहीं है, बल्कि उनके लिए तो ये एक सज़ा के समान है, लेकिन कभी-कभी तकलीफों को दूर करने के लिए थोड़ा हंसी मज़ाक ज़रूरी है।
बेशक हमारे इस अमल से हमारी तकलीफ तो दूर नहीं हो सकती है, लेकिन कभी-कभी तकलीफ को भुलाने के लिए, अगर उस पर हंस लिया जाए, तो उसमें थोड़े वक़्त के लिए कमी आ जाती है।
तो हम बात कर रहे थे, कि आज हम आपके सामान्य ज्ञान की परीक्षा लेंगे।
जिसके तहत हम आप सभी भोपाल वासियों से यह जानना चाहते हैं, कि जैसा कि शहर ऐ भोपाल के लिए मशहूर है, कि हमारा भोपाल झीलों का शहर है, उसको झीलों की नगरी कहा जाता है, और हमारे शहर की खूबसूरती और तहज़ीब भारत में ही नहीं, बल्कि सारी दुनिया में विख्यात है।
तो आपका जवाब होगा, कि भोपाल शहर में बड़ा तालाब, छोटा तालाब, मोतिया तालाब, सिद्दीक़ हसन तालाब, सारंग पाणी तालाब, पिपलानी, शाहपुरा तालाब मौजूद हैं.
तो आपका जवाब बिल्कुल गलत है, क्योंकि बारिश का मौसम आते ही हमारे भोपाल में कई सारे छोटे-छोटे तालाब पैदा हो जाते हैं, और बारिश का मौसम खत्म होते ही वो तालाब फिर अगले साल तक के लिए गायब हो जाते हैं।
जैसा कि आप सभी जानते हैं, कि इन तालाबों में नाव या क्रूज़ नहीं चलता है, बल्कि इन तालाबों में लोग पैदल, साइकिल, मोटरसाइकिल, तीन पहिया वाहन, कार, मिनी ट्रक और ट्रक तक गुज़रते हैं।
जैसा कि आप इस आर्टिकल में लगी इमेजस के द्वारा समझ सकते हैं।
कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं, कि आपके घर के पास किस जगह बारिश के मौसम में छोटे-छोटे तालाब पैदा हो जाते हैं।
लेकिन इन तालाबों की एक खासियत है, कि ये तालाब नगर निगम कर्मचारियों और अधिकारियों को कभी भी दिखाई नहीं देते हैं, बाकी आम जनता को दिखाई देते हैं।
क्योंकि अगर नगर निगम कर्मचारियों और अधिकारियों को यह बारिश के मौसम में पैदा होने वाले छोटे-छोटे तालाब दिखाई देते, तो वो इतने सालों में शहरवासियों की इस तकलीफ का समाधान जरूर कर देते।
"भोपाली जुगतें"
हमारे भोपाल में एक खास तरीका है बात को खाने का और हम भोपाली इसके लिए मशहूर हैं सारी दुनिया में तो लिए हम आपको बताते हैं कि किस तरह से इन छोटे-छोटे तालाबों के बारे में बात की जाती है;
इन तालाबों में से जब मोटर साइकिल निकलती है, तो लोग कहते हैं कि देखो खां मियां कैसी तैरती हुई जा रही है।
अरे खां पठान तालाब में से कार लेकर निकला तो कार पूरी डूब गई और कार की कांच तक पानी आ गया।
भाई खां हम तो सब्ज़ी नाव में लेने जाते हैं।
सर से पैर तक सिंगला पीस बरसाती लिया हूं, घर के सामने गर्दन गर्दन तक पानी जमा हो जाता है।
बारिश में ख़ां हमारे लिए बड़ी आसानी हो जाती है, बच्चे घर के सामने ही तैर लेते हैं।
भाई मियां बारिश में तो हम घर के सामने मछली पाल लेते हैं, बड़ा मज़ा आता है।
लेखक इमरान उज़ ज़माँ
ई-मेल imranuzzaman01@gmail.com