भारतीय रुपया लगातार डॉलर के मुकाबले कमजोर होता जा रहा है। 2014 में 1 डॉलर की कीमत करीब ₹62 थी, जबकि फरवरी 2025 में यह बढ़कर ₹87 हो गई। यानी 11 साल में रुपया करीब 41% गिरा है।


नई दिल्ली (न्यूज़ मोहल्ला)

भारतीय रुपया लगातार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होता जा रहा है। 2014 की शुरुआत में जहाँ 1 डॉलर की कीमत लगभग ₹61.86 थी, वहीं फरवरी 2025 में यह बढ़कर ₹87.29 पहुँच गई। यानी, 11 साल में रुपया करीब 41% अवमूल्यित हो चुका है।


साल-दर-साल रुपये की स्थिति

वर्ष 1 USD = INR (औसतन / शुरुआती दर)

2014 ₹61.86

2015 ₹63.58

2016 ₹66.46

2017 ₹67.76

2018 ₹63.67

2019 ₹69.43

2020 ₹71.36

2021 ₹73.11

2022 ₹74.39

2023 ₹82.75

2024 (Dec) ₹85.61

2025 (Feb) ₹87.29


(स्रोत: Wikipedia – History of the Rupee, Reuters Currency Reports 2024)


क्यों गिरी कीमत?

विदेश से कच्चा तेल और सामान महँगा होना

डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेश में कमी

वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक तनाव


आम लोगों पर असर..

पेट्रोल, डीज़ल और गैस महँगे

विदेश में पढ़ाई और यात्रा की लागत बढ़ी

आयात पर निर्भर उद्योगों की लागत बढ़ी


महँगाई: डॉलर मज़बूत होने से पेट्रोल, डीज़ल, गैस और दवाइयों जैसे आयातित सामान महँगा हुआ।

शिक्षा और यात्रा: विदेशों में पढ़ाई करने वाले छात्रों और यात्रियों को दोगुना खर्च उठाना पड़ा।

उद्योगों पर दबाव: कच्चे माल का आयात महँगा होने से ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और फ़ार्मा उद्योगों की लागत बढ़ी।


सरकार और विशेषज्ञों की राय

सरकार का दावा: 
रुपये की गिरावट “नियंत्रित दायरे” में है और भारत की विकास दर अभी भी दुनिया में सबसे तेज़ है।

विशेषज्ञों का मत:
 डॉलर की मजबूती, कच्चे तेल की ऊँची कीमतें, और विदेशी निवेश में कमी इसके मुख्य कारण हैं।

भविष्य की चुनौती: 
भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक मंदी की आशंकाएँ रुपये को और दबाव में ला सकती हैं।


निष्कर्ष

2014 से 2025 तक रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर हुआ और लगभग 41% की गिरावट दर्ज की। यह प्रवृत्ति आम जनता की जेब से लेकर देश की अर्थव्यवस्था तक, हर स्तर पर असर डाल रही है। अब निगाह इस बात पर है कि सरकार और वित्तीय संस्थाएँ रुपये को स्थिर करने के लिए आगे क्या ठोस कदम उठाती हैं।

न्यूज मोहल्ला - एडिटर इन चीफ 
          फैजुद्दीन खान 9301363785/7999357775