न्यूज मोहल्ला ब्यूरोा | इंदौर | 2 फरवरी 2026

एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) ने इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान निर्वाचन आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दूसरे चरण पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संगठन का आरोप है कि FORM-7 के माध्यम से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है, जिसमें नियमों की अनदेखी और पारदर्शिता की कमी साफ नजर आ रही है।

APCR के स्टेट कोऑर्डिनेटर ज़ैद पठान ने बताया कि SIR प्रक्रिया के दूसरे चरण की अंतिम तारीख से पहले इंदौर सहित मध्यप्रदेश के कई जिलों में थोक में आपत्तियाँ दाखिल की गई हैं। उन्होंने कहा कि कई मामलों में जिन मतदाताओं के खिलाफ आपत्ति दर्ज की गई, उन्हें इसकी कोई सूचना तक नहीं दी गई।

संगठन ने बताया कि नियमों के अनुसार मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए या तो निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आपत्ति दर्ज की जाती है, या फिर संबंधित BLO के समक्ष FORM-7 भरकर आपत्ति दी जाती है। लेकिन कई स्थानों पर BLO को आपत्तियों के बंडल सौंपे जाने की बात सामने आई है, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि ये आपत्तियाँ कहां से और किसके निर्देश पर आई हैं।

APCR का आरोप है कि कई जगह एक ही आपत्तिकर्ता द्वारा 50-50 मतदाताओं के खिलाफ आपत्तियाँ लगाई गईं, जबकि खुद आपत्तिकर्ताओं को यह भी जानकारी नहीं है कि उन्होंने किन-किन मतदाताओं के नामों पर आपत्ति दर्ज कराई है। कुछ मामलों में दूसरे शहरों के लोगों के नाम से आपत्तियाँ लगाए जाने की भी बात सामने आई है।

संगठन ने यह भी कहा कि SIR प्रक्रिया के पहले चरण और वर्ष 2003 की SIR प्रक्रिया के बाद जारी मतदाता सूची में शामिल मतदाताओं के नामों पर भी अब आपत्तियाँ लगाई जा रही हैं। APCR ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के जरिए खासतौर पर मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे उनके मताधिकार पर खतरा पैदा हो रहा है।