न्यूज मोहल्ला भोपाल, सितम्बर 2025।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रविवार को एक ऐतिहासिक नज़ारा देखने को मिला। गुरु तेग बहादुर साहब के 350वें प्रकाश पर्व के अवसर पर निकले भव्य जुलूस में मुस्लिम समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और जुलूस में आए हुए लोगों का फूल और मालाएँ से सम्मान किया। इस पूरे कार्यक्रम का आयोजन रहमान फाउंडेशन द्वारा किया गया।

गुरु तेग बहादुर साहब कौन थे?

गुरु तेग बहादुर साहब


गुरु तेग बहादुर (1621–1675) सिखों के नवम गुरु थे। उन्हें “हिन्द की चादर” कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने अपनी शहादत से न सिर्फ सिख धर्म बल्कि पूरे हिंदुस्तान में धर्म और इंसानियत की रक्षा की।

350वां प्रकाश पर्व क्या है?
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सिख परंपरा में किसी गुरु की जयंती को प्रकाश पर्व कहा जाता है। इस वर्ष गुरु तेग बहादुर जी के जन्म को 350 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इसी मौके पर देश और विदेश में बड़े स्तर पर धार्मिक कार्यक्रम, नगर कीर्तन, कीर्तन दरबार और भाईचारे के संदेश वाले आयोजन किए जा रहे हैं।

भोपाल का अनोखा जुलूस

जम कर बरसे फूल
जुलूस में सिख  बड़ी संख्या में शामिल हुई और पूरे शहर में श्रद्धा और सम्मान का माहौल देखने को मिला।

रहमान फाउंडेशन और भोपाल के मुस्लिम समाज के लोगों ने मंच पर जुलूस में आए हुए सिखो के गुरुओं और अन्य लोगों का फूल और मालाओं से सम्मान किया

इस पहल ने न केवल आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया, बल्कि सिख और मुस्लिम समाज के बीच भाईचारे और मोहब्बत की नई मिसाल पेश की।


रहमान फाउंडेशन की भूमिका
रहमान फाउंडेशन
इस आयोजन की कमान मौलाना सज्जाद नोमानी साहब की संस्था रहमान फाउंडेशन ने संभाली। जुलूस के साथ आए गुरुओं ने बताया कि गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान किसी एक धर्म के लिए नहीं बल्कि पूरी इंसानियत के लिए था। इसलिए आज मुस्लिम समाज का यह सम्मान उसी भाईचारे का प्रतीक है, जिसे गुरु जी ने अपने जीवन से जीवंत किया।

भाईचारे का संदेश

जुलूस के दौरान दोनों समुदायों के लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाया और समाज में शांति, एकता और सद्भाव बनाए रखने का संकल्प लिया। आयोजन में उपस्थित बुज़ुर्गों और गुरुओं का कहना था कि भोपाल ने इतिहास रचा है, जहाँ गुरु साहब की जयंती पर दोनों मज़हब एक साथ दिखाई दिए।