मकर संक्रांति और बसंत पंचमी के आसपास पतंगबाजी का शौक बढ़ जाता है। लेकिन इसी दौरान सड़क पर चल रहे लोगों और बाइक सवारों के लिए सबसे बड़ा खतरा बनता है, कांच और केमिकल से बना खतरनाक मांझा। यह पतला धागा चाकू की धार की तरह काटता है और हर साल कई लोगों की जान ले लेता है।

सरकार और NGT ने इसे बैन कर रखा है, लेकिन फिर भी यह धड़ल्ले से बिक रहा है।

सवाल उठता है ~ जब चीज इतनी खतरनाक है तो यह रुक क्यों नहीं रही?

क्या पुलिस चाहे तो इसे पूरी तरह बंद कर सकती है?

मांझा बैन है, फिर भी कैसे बिक रहा है?

बात साफ है ~ यह धंधा पूरी तरह चोरी-छुपे चलता है।

छोटे–छोटे कमरों में बनता है

यह मांझा लोकल वर्कशॉप में तैयार होता है, जहाँ
नायलॉन धागे में
– कांच का पाउडर
– गोंद
– केमिकल
मिलाया जाता है।
इन जगहों का पता लगाना मुश्किल होता है।

दुकानदार सप्लायर का नाम नहीं बताते

पुलिस पूछताछ करती है, लेकिन दुकानदार
या तो किसी का नाम नहीं बताते
या गलत एड्रेस देते हैं।
यह चेन आगे ही नहीं बढ़ पाती।

नाम बदलकर बेचा जाता है

“कटिंग मांझा”, “स्ट्रॉन्ग लाइन”, “पावर मांझा”…
नाम बदलते ही पकड़ से बच जाते हैं।

डिमांड बहुत है

कई लोग खुद जाकर बोलते हैं,
“चाइनीज़ वाला दो”,
“कटिंग वाला चाहिए।”
डिमांड है, इसलिए सप्लाई भी चल रही है।

खतरा कितना बड़ा है?

हर साल ऐसे मामले सामने आते हैं जहाँ,

बाइक सवार का गला कट जाता है

बच्चों को गहरी चोट लगती है

पक्षियों की मौत होती है

बिजली के तारों में शॉर्ट सर्किट होता है

पुलिस भी सुरक्षा के लिए
बाइक पर “एंटी-मांझा रॉड”
और
गले पर पट्टे
लगवाने का अभियान चलाती है।

लेकिन असली सवाल समस्या की जड़ पर है।

क्या पुलिस चाहे तो मांझे का धंधा पूरी तरह बंद हो सकता है?

जवाब: हाँ, बिल्कुल।

अगर पुलिस और प्रशासन सख्ती से कार्रवाई करें, तो यह कारोबार 15–20 दिनों में खत्म हो सकता है।
कैसे?

1. दुकानदार से सप्लायर की चेन पकड़ें


एक दुकानदार पकड़ा ~ उससे सप्लायर का नाम
~ फिर उससे आगे
~ फिर फैक्ट्री तक।
अगर यह चेन लगातार खींची जाए तो
पूरी जड़ पकड़ में आ जाती है।

2. रात में चलने वाली सप्लाई पर नकेल


ज्यादातर माल रात में आता है।
रात के रूट पर चेकिंग बढ़े तो सप्लाई रुक सकती है।

3. ऑनलाइन धंधे पर रोक


Amazon, Meesho और सोशल मीडिया पर इसे कोड वर्ड में बेचा जाता है।
साइबर टीम इसे आसानी से ट्रैक कर सकती है।

4. फैक्ट्रियों पर सीधी कार्रवाई


जहाँ मांझा बन रहा है, उन्हीं ठिकानों पर छापे पड़ें,
तो 70% धंधा उसी दिन खत्म।

5. त्योहार से 10 दिन पहले स्पेशल ड्राइव


यदि पुलिस त्योहार से पहले
रोजाना अभियान चलाए,
तो बाजार में यह धागा पहुँचेगा ही नहीं।