गंगनौली (बागपत),| न्यूज़ मोहल्ला डेस्क
उत्तर प्रदेश के बागपत ज़िले के गंगनौली गांव स्थित बड़ी मस्जिद परिसर में रविवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। मस्जिद में तैनात इमाम मोहम्मद इब्राहीम की पत्नी इसराना (30 वर्ष) और उनकी दो मासूम बेटियाँ सोफिया (5 वर्ष) तथा सुमैया (2 वर्ष) की बेरहमी से हत्या कर दी गई। यह घटना उस समय हुई जब इमाम किसी कार्यक्रम के सिलसिले में देओबंद गए हुए थे।
घटना का खुलासा
रविवार दोपहर जब मस्जिद परिसर में बच्चे तालीम लेने पहुँचे, तो उन्होंने कमरे के भीतर खून से लथपथ तीनों शव पड़े देखे। बच्चों के शोर मचाने पर गांव में हड़कंप मच गया। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद एसपी बागपत, फोरेंसिक टीम और उच्चाधिकारी मौके पर पहुँचे।
शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। शुरुआती जांच में पता चला कि हत्या धारदार हथियार और हथौड़े से की गई है।
पुलिस की जांच और गिरफ्तारी
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो नाबालिग छात्रों (उम्र 14 और 15 वर्ष) को हिरासत में लिया है, जो मस्जिद से जुड़े मदरसे में पढ़ाई करते थे।
बागपत पुलिस के अनुसार, शुरुआती पूछताछ में दोनों छात्रों ने अपराध स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि वे इमाम की डांट-फटकार और अपमान से नाराज़ थे और “बदला” लेने की भावना से इस घटना को अंजाम दिया।
पुलिस ने घटनास्थल से धारदार हथियार और हथौड़ा बरामद किया है। सीसीटीवी फुटेज, फिंगरप्रिंट और अन्य फोरेंसिक साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
सीसीटीवी और तकनीकी साक्ष्य
सूत्रों के मुताबिक मस्जिद परिसर में लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग पुलिस ने जब्त कर ली है। कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि घटना से पहले DVR सिस्टम बंद था, जिसकी जांच जारी है।
परिवार और समुदाय की प्रतिक्रिया
इमाम मोहम्मद इब्राहीम के परिवार ने घटना पर गहरा आक्रोश जताया है और निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका कहना है कि “दो नाबालिग बच्चों द्वारा इतनी निर्ममता से वार करना संदेह पैदा करता है।”
गांव में शोक और भय का माहौल है। समुदाय के लोगों ने भी प्रशासन से सीबीआई या उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
वर्तमान स्थिति
पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। चूंकि वे नाबालिग हैं, इसलिए बाल न्याय अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई होगी।
फोरेंसिक, डीएनए और सीसीटीवी विश्लेषण जैसी तकनीकी जांचें जारी हैं। पुलिस ने कहा कि “साक्ष्यों के आधार पर किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।”
समाज के लिए संदेश
यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि समाज के नैतिक और शैक्षिक ढांचे पर गहरी चोट है।
कम उम्र में हिंसक प्रवृत्ति, शिक्षक-छात्र संबंधों की नाजुकता और सामाजिक संवेदनशीलता पर फिर से सवाल उठे हैं।
मनोविज्ञान विशेषज्ञों का मानना है कि “बच्चों के अंदर की कुंठा और अपमान की भावना को समय रहते समझना और संभालना बेहद ज़रूरी है, वरना उसके परिणाम भयानक हो सकते हैं।”
रिपोर्ट: न्यूज़ मोहल्ला टीम
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