इंदौर। शहर के जुनी इलाके के रहने वाले 42 वर्षीय मजदूर गोविंद की मौत कुत्ते के काटने से हुई। गोविंद को तीन महीने पहले एक आवारा कुत्ते ने काटा था, लेकिन उन्होंने लापरवाही बरतते हुए समय पर एंटी-रेबीज इंजेक्शन नहीं लगवाया।

परिवारजन तब सतर्क हुए जब गोविंद की हालत अचानक बिगड़ने लगी। शुक्रवार (5 सितंबर) को उन्हें महाराजा यशवंतराव (MY) अस्पताल लाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद पहली बार उन्हें पहली डोज दी, लेकिन तब तक रेबीज के लक्षण स्पष्ट हो चुके थे।

अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, गोविंद को हाइड्रोफोबिया (पानी से डर) और एयरोफोबिया (हवा के झोंके से डर) जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दे रहे थे। यही लक्षण रेबीज के अंतिम चरण को दर्शाते हैं। इलाज के दौरान शनिवार को उनकी मौत हो गई।

डॉक्टरों की चेतावनी

डॉक्टरों का कहना है कि कुत्ते के काटते ही तुरंत एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाना जरूरी है। इंजेक्शन की पूरी श्रृंखला लिए बिना रेबीज से बचाव संभव नहीं है। एक बार बीमारी शरीर में सक्रिय हो जाए तो इसका कोई इलाज नहीं बचता और यह लगभग हमेशा जानलेवा साबित होती है।

जागरूकता की ज़रूरत

यह मामला बताता है कि छोटी-सी लापरवाही कितनी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अपील की है कि लोग कुत्ता, बिल्ली या किसी भी जानवर के काटने को हल्के में न लें और तुरंत अस्पताल जाकर वैक्सीन की पूरी डोज लगवाएँ।


फैजुद्दीन खान
प्रधान संपादक – न्यूज मोहल्ला