हम सभी के सामने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के द्वारा पिछले कुछ समय से लगातार इस तरह की खबरें आ रही हैं।
जहां पर पत्नी द्वारा उसके पति का कत्ल किया जा रहा है, और केसेस की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है, इन हत्याओं की वजह एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स है।
एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में पिछले 5 सालों में 5 राज्यों में 785 पतियों की हत्या उनकी पत्नियों द्वारा की गई है, इस डाटा का स्त्रोत NCRB राज्य क्राइम डाटा है।
आज हम इस लेख में इस विषय पर बात करेंगे, कि औरतें जो की शालीनता को गहने की तरह पहनती थी, कि वह इतनी आक्रामक और क्रूर कैसे होती जा रही हैं, कि वह अपने पति की हत्या करने से भी परहेज़ नहीं कर रही हैं।
औरतों का व्यवहार हिंसक होने की वजह हो सकती है।
मां बाप का अपने बच्चों की निगरानी नहीं कर पाना;
मां बाप इस दौर में अपने बच्चों को अच्छे संस्कार नहीं दे पा रहे हैं या यह कहना ज्यादा ठीक रहेगा, कि उनके पास अपने बच्चों को देने के लिए कुछ अच्छा नहीं है, और वह सिर्फ पहाड़ पर बैठकर बकरियां चरा रहे हैं।
दूसरा जब से सोशल प्लेटफॉर्मस हर एक के लिए आम हुए हैं, तब से सभी ने इसका फायदा उठाया है, और अपराधियों ने भी इसका बड़ी मात्रा में फायदा उठाया है, साइबर क्राइम इसका उदाहरण है।
माता पिता जो कि अपने बच्चों की निगरानी करने में असमर्थ साबित हो रहे हैं, इसका नुकसान यह होता है, कि हमारे बच्चे गलत लोगों की संगत और सोहबत में पड़ जाते हैं, और इस संबंध में धार्मिक शिक्षा है, कि इंसान उसके दोस्त के धर्म का अनुसरण करता है, इसके सही मायने यह हैं, कि एक व्यक्ति उसके दोस्त के एक्शंस को फॉलो करता है।
मां बाप का अंधा प्यार;
एक अनुयाई सतयुग में एक सपना देखते हैं, और उसमें देखते हैं, कि एक गाय उसके बछड़े को खूब लाड कर रही है, वह इतना लाड करती है, कि उसके बछड़े की खाल में से खून आने लगता है, इस पर उस अनुयाई का सपना टूट जाता है, वह उनके सपने की व्याख्या के लिए एक धर्मगुरु के पास जाते हैं, तो वह धर्मगुरु मुस्कुराकर इस अनुयाई से कहते हैं, कि कलयुग में ऐसा समय आएगा, कि मां-बाप अपनी औलाद को इतना प्यार करेंगे, कि वह प्यार औलाद के लिए और मां-बाप के लिए नुकसानदेह साबित होगा।
इसलिए अब माता-पिता को भी चाहिए, कि वह अपनी बेटी की रज़ामंदी के बिना बिल्कुल भी शादी ना करें, और मां बाप कम से कम इतनी R&D तो अपनी बेटी के बारे में करें, कि उनकी बेटी का किसी से अफेयर तो नहीं है, और अगर अफेयर है, तो उसी से उसकी शादी कर दें, ताकि एक बेगुनाह व्यक्ति की जान सुरक्षित हो सके।
सिनेमा का गहरा असर;
जब से वेब सीरीज का आगमन हुआ है तब से गांव की पृष्ठभूमि को या निम्न वर्ग की पृष्ठभूमि को ध्यान में रखकर अनगिनत वेब सीरीज बन चुकी है, जिसमें बड़ी मात्रा में क्राइम बल्कि सिर्फ क्राइम ही दिखाया जा रहा है, और उसको बहुत नॉर्मलाइज़ तरीके से समझाया जा रहा है, कि यह समाज का एक अभिन्न अंग है।
पहले सिनेमा के माध्यम से कुंवारे लड़का लड़की को प्रेम प्रसंग के लिए उभर गया, फिर अब एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स की भी वेब सीरीज़ और सिनेमा में बाढ़ आई हुई है, यहां तक की सगे संबंधियों का आपस में इल्लीगल रिश्तों में इन्वॉल्व होना बहुत नॉर्मल बताया जा रहा है।
वफादारी पीछे छूट रही है, हर व्यक्ति सिर्फ दुनिया के सुखों को भोगने के पीछे पागल हो रहा है, हमारे दिलों में लालच और वासना बढ़ती जा रही है।
अब सिनेमा में हीरो वह काम कर रहा है, जो पुराने दौर की फिल्मों में विलेन भी नहीं करता था, अब सिनेमा देखकर यह एहसास नहीं होता, कि हीरो कौन है और विलेन कौन? क्योंकि दोनों ही एक समान रोल करते हैं, इससे नैतिक मूल्यों का विघटन हो रहा है, और आम इंसान के व्यवहार में अपराधी प्रवृत्ति और लालच बढ़ रही है।
अपराध का संबंध अपराधी से है;
यह बात बिल्कुल सच है, कि अपराध का संबंध किसी भी लिंग, जाति, धर्म, शहर या देश से नहीं है।
अपराध का सीधा संबंध लचर कानून व्यवस्था से है;
बल्कि अपराध का संबंध लचर कानून व्यवस्था से है, अब क्योंकि बहुत सारे बल्कि अक्सर पॉलीटिशियंस भी जघन्य अपराधों में लिप्त हैं, जिन केसेस पर फैसला आना बाकि है, लेकिन उनके केसेस में फैसला आने में 50 साल लग जाते हैं, लोगों को इससे भी अपराध करने के लिए बढ़ावा मिलता है।
फिर अगर कोई अपराधी उसके अपराध की सज़ा पाता है, तो दुर्भाग्य से वह सुधरता नहीं है, बल्कि वह और भी ज़्यादा बिगड़ जाता है, इस संबंध मेरा ऐसा अनुमान हैं, कि हमारे यहां जो व्यक्ति पॉकेट मार कर जेल जाता है, वह चोर बनकर जेल से निकलता है, और जो चोरी के इल्ज़ाम में जेल जाता है, वह डकैत बनकर जेल से निकलता है।
अभी यह विषय नया है, इसलिए इसमें लोगों को उत्सुकता है;
जैसा कि आपने ज़िक्र किया की मर्द सदियों से औरतों के ऊपर अपराध कर रहे हैं, और औरतों को प्रताड़ित कर रहे हैं, यहां तक कि दहेज के लिए उनको जिंदा जला दिया जाता था, और भी उनके साथ ज़ुल्म किया जाता है, लेकिन यह समाज में इतना आम हो चुका है, कि अब लोग इसको खबर की तरह नहीं लेते।
लेकिन अगर एक औरत किसी मर्द का कत्ल करती है, तो यह चीज़ समाज के लिए बिल्कुल नई है, हमारे यहां लोग क्राइम पेट्रोल और इस तरह की क्राइम सीरीज़ को देखते हैं, यह वह लोग हैं, जो कि बिल्कुल अच्छे व्यवहार वाले हैं, कुछ भी नया आए लोग इस संबंध में जानकारी एकत्रित करते हैं, उसको देखते हैं, उस पर बात करते हैं, कि औरतें किस तरह से आक्रामक हो रही हैं, अब किसी भी पति की जान को उनसे खतरा है, वगैरह वगैरह, क्योंकि आम आदमी के पास बात करने के लिए कुछ कंस्ट्रक्टिव नहीं है, इसलिए वह बिल्कुल आम मसलों पर बात करना चाहता है।
इस विषय पर सरगर्मी की एक वजह यह भी है, क्योंकि सारे मर्दों को कुछ मर्दों के द्वारा किए गए, बुरे कामों के संबंध में, जो कि उन्होंने औरतों के साथ किए थे, नारीवादी संगठनों द्वारा सारी मर्द जाति को कसूरवार ठहराया जाता रहा है, इसलिए अब मर्द भी इस बात को आगे बढ़ा रहे हैं, दुर्भाग्य से जब नारीवादी संगठनों ने सारे मर्दों को टारगेट किया, तब किसी ने उनसे यह नहीं बोला, कि आप किसी भी व्यक्ति के द्वारा किए गए अपराध को उसके लिंग या जाति से जोड़कर नहीं देख सकते हैं।
राय क़ायम करने से बचना चाहिए;
फिर भी इस संबंध में कोई राय क़ायम नहीं करना चाहिए, क्योंकि बड़ी तादाद में अच्छी औरतें और अच्छे मर्द समाज में मौजूद हैं चंद कैसेस को बेस बनाकर, उस अपराध को किसी भी लिंग या जाति से जोड़कर नहीं देखा जा सकता है।
धन्यवाद