न्यूज मोहल्ला/मध्य प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के बीच स्मार्ट मीटर को लेकर जारी विवाद और असमंजस के बीच अब स्थिति धीरे-धीरे स्पष्ट होती नज़र आ रही है। हाल के महीनों में राज्य सरकार, बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) और नियामक आयोग (MPERC) द्वारा लिए गए निर्णयों से संकेत मिलते हैं कि स्मार्ट मीटर लगाने की अनिवार्यता पर फिलहाल राहत दी गई है और इसकी समयसीमा को बढ़ाए जाने पर विचार चल रहा है।
MPERC का ताज़ा आदेश - अब हर उपभोक्ता पर अनिवार्यता नहीं
मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (MPERC) ने वर्ष 2025 में Petition No. 02 of 2025 पर 20 अगस्त को जारी आदेश में यह स्पष्ट किया है कि सभी उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर या प्रीपेड मीटर अनिवार्य रूप से लगाना ज़रूरी नहीं होगा। आयोग ने बिजली कंपनियों को उपभोक्ताओं की श्रेणी और तकनीकी उपयुक्तता के आधार पर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
इससे पहले Petition No. 39 of 2024 और Petition No. 02 of 2024 में भी आयोग ने इसी तरह की राहत दी थी, जिसमें कहा गया था कि सभी कनेक्शनों पर मीटर लगाना अनिवार्य नहीं है।
मीडिया रिपोर्ट्स - 31 मार्च 2028 तक बढ़ सकती है समयसीमा
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स (जैसे Times of India, Patrika) के अनुसार, बिजली कंपनियों ने स्मार्ट मीटर लगाने की समयसीमा को 31 मार्च 2028 तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है, जिसे आयोग द्वारा स्वीकार किए जाने की चर्चा है।
हालाँकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है।
अतः यह तारीख फिलहाल प्रस्तावित या विचाराधीन मानी जा रही है, न कि अधिसूचित आदेश।
उपभोक्ताओं के विरोध के बाद राहत
राज्य के कई जिलों में उपभोक्ताओं द्वारा “फास्ट चलने वाले स्मार्ट मीटर” को लेकर शिकायतें और विरोध दर्ज किए गए।
कुछ स्थानों पर नोटिस जारी कर उपभोक्ताओं को “सात दिन में मीटर न लगवाने पर लाइन काटने” की चेतावनी दी गई थी, लेकिन विरोध के बाद ऐसे नोटिसों को रद्द कर दिया गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब उपभोक्ताओं को मीटर लगाने से पहले सहमति देने का अधिकार दिया जा रहा है।
वर्तमान स्थिति
अब तक राज्य में लगभग 21 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं।
सरकार का लक्ष्य लगभग 1.34 करोड़ मीटर लगाने का है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मीटरिंग सिस्टम को “बिजली प्रबंधन में पारदर्शिता” के लिए ज़रूरी बताया है।
वहीं विपक्ष ने इसे “उपभोक्ताओं पर थोपने” का आरोप लगाते हुए विरोध किया है।
लब्बोलुआब:
वर्तमान में मध्य प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाना पूरी तरह अनिवार्य नहीं है।
MPERC के हालिया आदेशों के अनुसार, इसे चरणबद्ध रूप से और उपभोक्ता की सहमति के साथ लागू किया जाएगा।
31 मार्च 2028 तक की समयसीमा अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं की गई है, बल्कि यह केवल विचाराधीन प्रस्ताव है।