जैसा कि आप सभी जानते हैं न्यूज़ मोहल्ला आपके लिए वह विषय लेकर आता है, जो कि हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़ा होता है।

तो आज एक ऐसे विषय पर हम बात करेंगे, जो कि हर घर से जुड़ा हुआ है, हमारे बच्चों से जुड़ा हुआ है।

आज ही एक प्रतिष्ठित अखबार में यह खबर छपी है, कि बच्चों का स्क्रीन टाइम यानी कि एक दिन में वह कितना समय मोबाइल पर बिता रहे हैं, तो 80 मिनट एक कम उम्र बच्चा मोबाइल पर बिता रहा है।

जैसा कि हम सभी जानते हैं, अति किसी भी चीज़ की खतरनाक है, वही फार्मूला मोबाइल के केस में या किसी भी केस में लागू होता है, जैसा कि हम सभी जानते हैं, कि शहद सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है, लेकिन एक निश्चित मात्रा के ज़्यादा उसका भी सेवन किया जाए, तो एक समय के बाद वह भी नुकसानदेह साबित हो जाएगा।

ठीक इसी तरह मोबाइल का अधिक इस्तेमाल बच्चों की सेहत पर बहुत ही नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है, तो आइए हम जानते हैं, कि मोबाइल के अधिक इस्तेमाल से बच्चों को कौन-कौन से नुकसान उठाने पड़ते हैं।

 शारीरिक नुकसान:

आंखों की रोशनी का काम होना नींद की समस्या
न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर मोटापा
रीढ़ की हड्डी और गर्दन में दर्द हाथों का सुन्न होना
देर से बोलना या ठीक से नहीं बोल पाना।

मानसिक नुकसान:

एकाग्रता में कमी
सामाजिक कौशल का विकास बाधित होना
व्यवहार में चिड़चिड़ापन
व्यवहार में आक्रामकता।

 आर्थिक नुकसान:

ऑनलाइन ठगी का शिकार
ऑनलाइन गेम में पैसा खर्च करना

सामाजिक नुकसान:

अब ऐसा देखने में आ रहा है, कि पिछले कुछ समय से नाबालिग लड़के भी रेप जैसा घिनौना अपराध कर रहे हैं, जिनकी उम्र 14 साल तक है, क्योंकि जब वह मोबाइल पर कोई वीडियो देखते हैं, तो मोबाइल पर अश्लील वीडियो आते हैं, जिनको वह एक्सेस करते हैं, और इस तरह के वीडियो और ऐप को देखते हुए मानसिक विकार का शिकार हो जाते हैं, जो कि समाज के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है, क्योंकि जब से इंटरनेट हर हाथ में आया है, रेप के केसेस लगातार बढ़ते जा रहे हैं, और अक्सर जिन रेपिस्ट को पकड़ा जाता है, जब उनकी जांच पड़ताल की जाती है, तो वह पॉर्न एडिक्ट होते हैं।

यह सब वह बातें हैं, जो कि मोबाइल के नुकसान को हमारे सामने लाती है, अब बच्चों के द्वारा मोबाइल के अधिक इस्तेमाल की वजह से माता और पिता बेहद परेशान है, और जब वह बच्चों पर मोबाइल के अधिक इस्तेमाल की वजह से दुष्परिणाम देखते हैं, तब वह एकदम से बच्चों पर सख़्ती करते हैं, और बच्चों को मोबाइल से दूर कर देते हैं, जो कि एकदम गलत है।

सबसे पहली बात तो यह कि माता पिता को बच्चों मोबाइल का इतना अधिक इस्तेमाल करने ही नहीं देना चाहिए था, क्योंकि ऐसा तो नहीं है, कि बच्चे कहीं पर छुपकर मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे थे, बल्कि हम ही उनको खुशी-खुशी मोबाइल का आदी कर रहे थे, उनको मोबाइल की लत लगा रहे थे, वो तो हमारे सामने ही खुल्लम-खुल्ला मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे थे, और माता और पिता उनको ऐसा करते हुए देख भी रहे थे, लेकिन जब यह बीमारी धीरे धीरे बढ़ रही थी, तब माता पिता ने इस पर ध्यान नहीं दिया, और जब इसने एक विकराल रूप धारण कर दिया, तब अचानक से माता पिता इसके संबंध में जागरूक हुए।

खैर अगर हमें एक बीमारी का इलाज करना है, तो उसके लिए जरूरी है, कि जब तक हम उस बीमारी की वजह को और उसको दूर करने के तरीके को नहीं समझ लेंगे, तब तक हम ठीक तरीके से इलाज नहीं कर पाएंगे, क्योंकि मोबाइल को एडिक्शन कहा जाता है, और जहां पर भी एडिक्शन का इस्तेमाल होता है, उसके आगे नशा ज़रूर जुड़ा रहता है, यही गलती हम नशा करने वालों के साथ भी लोग करते हैं कि उनको एकदम से सुधारने की कोशिश करते हैं, जिसकी वजह से सुधार काम और बिगाड़ ज़्यादा होता है।

इसलिए माता और पिता को इस संबंध में जो वीडियो यूट्यूब पर उपलब्ध है, उनको देखकर बच्चों में मौजूद इस मोबाइल एडिक्शन की बीमारी का इलाज करना चाहिए।

इसके साथ ही यह कुछ उपाय हैं, जोकि बच्चों में मौजूद मोबाइल की लत को छुड़वाने के लिए कारगर साबित हो सकते हैं:

माता और पिता को पहले खुद मोबाइल का कम इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि हमारे बच्चे हमें सुनकर नहीं, बल्कि देखकर सीखते हैं, इसलिए अगर हम किताब पढ़ेंगे, तो बच्चे हमें ऐसा करते हुए देखकर खुद भी किताब पढ़ना शुरू कर देंगे, और हमें दिन का एक बड़ा हिस्सा मोबाइल में बिताते हुए देखेंगे, तो वह भी मोबाइल के आदी होंगे।

मैंने एक अनुभवी व्यक्ति की आप बीती सुनी, जिसमें उन्होंने बताया, कि वह और उनकी पत्नी रोज़ उनके बेटे को रात में ब्रश करने के लिए कहते थे, और यह चाहते थे, कि उनका बेटा इस अच्छी आदत को अपनाए, लेकिन उनका बेटा बहुत सारे बहाने बनाता था, पति और पत्नी दोनों बहुत परेशान होते थे, लेकिन एक बार उन्होंने यह सोचा कि रात में वह दोनों बेटे के सामने ब्रश करेंगे, यह सिलसिला कुछ दिनों तक चला, एक रात अचानक से माता-पिता से पहले उनके बेटे ने खुद ही उसकी मर्ज़ी से ब्रश करना शुरू कर दिया, इस बात को लगभग 20 साल गुज़र चुके हैं, लेकिन बेटे की यह अच्छी आदत आज भी बरक़रार है।

बच्चों को मोबाइल देना ही नहीं चाहिए लेकिन अक्सर ऐसा देखने में आता है कि घर के लोग उसमें भी खासकर माय बच्चों को मोबाइल देती हैं और मोबाइल में वीडियो दिखाकर उनका खाना खिलाती है, और वह भी मोबाइल की धुन में खाना खाते जाते है, बल्कि गुटकते जाते हैं, इससे बच्चों में मोटापा भी बढ़ता है।

दरअसल हम इंसान जब अपने आप को किसी काम में नहीं लगाते हैं, तो जो खाली समय हमारे पास बचता है, उसको हम कहीं ना कहीं इस्तेमाल करते हैं, यही वजह है, कि हम मोबाइल का इस्तेमाल अपने खाली समय को दूर करने के लिए करते हैं।

इसलिए हमें अपने आप को अन एक्टिविटीज़ में बिज़ी रखना चाहिए, जो कि हमारे लिए शारीरिक और मानसिक रूप से फायदेमंद होती है, ऐसा करने से हमें आर्थिक लाभ भी होंगे, और सामाजिक लाभ भी होंगे।

यही व्यवहार हमें बच्चों के साथ भी करना चाहिए, कि हमें उनके साथ क्वालिटी टाइम एक्सपेंड करना चाहिए, उनका दोस्त बनकर उनके साथ खेलना चाहिए, उनको घुमाने ले जाना चाहिए, उनको स्पोर्ट्स एक्टिविटी में लगाना चाहिए, इससे बच्चों का चौतरफा विकास होता है।

माता और पिता का नुकसानदेह प्यार;

एक वाकया इस पूरे मामले को समझने के लिए बेहद असरदार साबित हो सकता है, एक अनुयाई ने सपना देखा, कि एक गाय उसके बछड़े को खूब लाड़ कर रही है, और वो इतना लाड़ करती है, कि उस बछड़े की खाल में से खून बहना शुरू हो जाता है, इस पर उस अनुयाई का सपना टूट जाता है, वह परेशान होकर फौरन एक धर्म गुरु के पास जाता है, और उस सपने के बारे में बताता है, इस पर वह धर्म गुरु कहते हैं, कि आने वाले समय में एक ऐसा दौर आएगा, जहां माता और पिता का प्यार औलाद के लिए नुकसानदेह साबित होगा, बच्चों को प्यार में मोबाइल देना और फिर मोबाइल का ज़्यादा इस्तेमाल ऊपर लिखे मामले को सत्यापित करता है।

अंत में सिर्फ इतना ही, कि इस दुनिया में हर चीज़ इंसान की आसानी के लिए है, और हम इंसानों की सेवक है, हमारी स्वामी नहीं है, इसलिए टेक्नोलॉजी भी हम इंसानों के लिए बेहतरीन सर्वेंट है, लेकिन बहुत खतरनाक मास्टर है।

 इस विषय पर कुछ दिनों पहले मैंने एक कविता लिखी थी, जिसको मैं आप लोगों के साथ साझा करना चाहता हूं।

वो जो निकल आती थी कभी घरों से, 

इठलाते-मस्ताते नटखटों की टोली, 

अब वो घरों से बाहर ही नहीं आती, 

जकड़ रखा है, इन नन्हें मासूमों को, 

एक "बुरे जादूगर" ने कब्ज़े में अपने, 

कर रखा है, उसने बच्चों को अपने वश में, 

गली, खेल मैदान, अब तो खाली ही रहते हैं, 

यहां आकर वह जो चहचहाते थे, नन्हे मुन्ने पंछी, 

वो अब हर वक़्त चार दिवारी में क़ैद ही रहते हैं, 

मां बाप भगाओ अपने घर से इस "बुरे जादूगर" को,

जिसने खुटे से बांध रखा है, हस्ते खेलते बचपन को।

लेखक इमरान उज़ ज़माँ 
ई-मेल imranuzzaman01@gmail.com