31 मई को "विश्व तंबाखू दिवस" है।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस कई सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (एसडीजी) के अंतर्गत आता है, ख़ास तौर पर एसडीजी 3 (अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण) और एसडीजी 10 (असमानताओं में कमी)।
अक्सर सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (एसडीजी) के तहत या हमारी सरकार के द्वारा हमारे समाज से सभी तरह की सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने के लिए अनेक तरह के प्रयास किए जाते हैं।
जो कि हम लोगों के जिंदा होने की एक पहचान है, कि हम सामाजिक बुराइयों के संबंध में एकजुट है, और उनको अपने बीच में से दूर करना चाहते हैं।
काश कि ऐसा हो जाए, की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और हमारी सरकारों के द्वारा सभी तरह की सामाजिक बुराइयों को प्रतिबंधित कर दिया जाए, तो लोगों को जागरूक करने के लिए प्रोग्राम नहीं चलाने पड़ेंगे।
आईए हम देखते हैं, कि हम भारतवासी तंबाकू से जुड़े पदार्थ का हर साल कितना सेवन करते हैं, जिसमें तंबाकू गुटका पान मसाला और सिगरेट आती है, तो हम भारतीय हर साल 25,000 करोड रुपए से अधिक तंबाकू पदार्थों का सेवन करते हैं।
राजस्थान में एक जिला है झुंझुनू यहां पर 715 करोड रुपए का तंबाकू एक साल में चलाया जाता है, इस जिले के रहवासी प्रतिदिन 2 करोड रुपए खर्च करते हैं।
"ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे 2019 के अनुसार भारत में 15 वर्ष से अधिक आयु के 26 करोड़ 70 लाख लोग, यानी कि हर पांचवा भारतीय इस लत का शिकार है, यानी कि 20% आबादी।
भारत में हर साल तंबाकू के सेवन से 2,50,000 मौतें होती हैं, प्रतिदिन 3500 लोग मारे जाते हैं।
हमारे देश में सरकारी इस पर जागरूकता फैलाने की हर संभव कोशिश करती हैं लेकिन जो व्यक्ति सो रहा हो उसको तो जगाया जा सकता है जो जाग रहा है उसको सरकार कैसे जगाएगी?
क्योंकि नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले "व्यक्ति की बुद्धि कुछ इस तरह से भ्रष्ट" हो जाती है, की वह जो तंबाकू उत्पाद खरीद रहा है, उस पर माउथ कैंसर वाले मरीज की फोटो छपी होती है, तब भी खरीदने वाला उसको नज़र अंदाज़ कर देता है।
हमारे समाज में फिल्मी सितारे और क्रिकेटर पान मसाले का प्रचार और प्रसार करते हैं, और नौजवान पीढ़ी जोकि देश का भविष्य है, उसको इस गंदगी की तरफ बुलाते हैं, यह इन आइडल्स लिए बेहद शर्म की बात है।
और जो लोग उनको अपना आइडल मानते हैं, और उनको अपना फैन कहते हैं, उनके लिए भी यह बेहद शर्म की बात है, कि उनका आईडल किस तरह की सामाजिक बुराइयों का ज़हर समाज में खोल रहा है।
हमारे देश की सरकार को तंबाकू के प्रोडक्ट्स की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाना चाहिए और इसको पूरे देश में प्रतिबंधित कर देना चाहिए।
क्योंकि अब तो इन पदार्थों की खुलेआम बिक्री हो रही है, और किराने की दुकान पर भी तंबाकू प्रोडक्ट्स मिल रहे हैं, शायद इस विभाग से जुड़े कर्मचारी गहरी नींद सो रहे हैं।
इसके साथ ही प्रशासन को नशा मुक्ति से जुड़े जो संगठन कम कर रहे हैं, उनके द्वारा हर वार्ड में एक नशा मुक्ति का केंद्र बनाना चाहिए।
जहां पर इस नशे को छोड़ने के संबंध में दवा दी जाए और उचित उपचार किया जाए।
मोहल्ले में नुक्कड़ नाटक के द्वारा इस संबंध में समाज को जागरूक किया जाए।
इसके साथ ही जितने भी आयुर्वेदिक, होम्योपैथी और यूनानी डॉक्टर हैं, जो आयुष मिनिस्ट्री के अंतर्गत आते हैं, उनको उनके क्लीनिक में नशा मुक्ति की दवा उपलब्ध करवानी चाहिए।
सोशल इनफ्लुएंसर को इस काम में लगाया जाए, और सोशल प्लेटफॉर्म्स पर शॉर्ट मूवीस के द्वारा, परिवारों और समाज को तबाह और बर्बाद कर देने वाली लत से रोका जाए।
डॉक्टर के द्वारा तंबाकू पदार्थ के सेवन से कौन-कौन सी बीमारियां होती हैं और उनके क्या दुष्परिणाम हमारे शरीर को भुगतने पडते हैं, यह बताया जाए।
सभी धर्म के धार्मिक गुरुओं के द्वारा, इस संबंध में लोगों को समझाइए देने के लिए कहा जाए, क्योंकि उनका समझाना लोगों के ऊपर गहरा असर डालता है।
सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि भारत में बसने वाला निम्न वर्ग तंबाकू पदार्थ का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करता है इस वर्ग के पिछड़े रहने की एक बड़ी वजह यह भी है कि यह अपनी गाड़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा नशे की लत में बर्बाद कर देते हैं।
यही वर्ग शिक्षा में सबसे पीछे है यह बच्चों को स्कूल में पढ़ा नहीं पता लेकिन इस लत मैं लिफ्ट व्यक्ति 100 रुपए रोज का नशा कम से कम करता है।
अगर इस व्यक्ति को यह समझाया जाए, कि अगर तुम नशा छोड़ दोगे, तो 30 दिन में कम से कम 3000 रुपए बचा लोगे।
इससे तुम अपने बच्चों को बहुत अच्छे स्कूल में पढ़ा सकते हो, ताकि वो शिक्षा ग्रहण कर अपनी स्थिति को बदलें, इन पैसों से बहुत अच्छी चीज़ें खा सकते हो, ताकि इसका फायदा तुम्हारे शरीर को पहुंचे।
ऐसा देखने में आता है कि इन परिवारों में दो-तीन लोग तो कम से कम नशा करते ही हैं, सोचिए कि यह महीने के 6000 रुपए सिर्फ नशे में बर्बाद कर देते हैं और इस वजह से खुद भी बर्बाद होते हैं।
इसके साथ ही नशा करने वालों के नशा करने की वजह से उनके व्यवहार को समझना बेहद जरूरी है कि उनको नशा करने की वजह से किन शारीरिक और मानसिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
क्योंकि बीमारी को समझे बिना उसका इलाज संभव नहीं है, और इस बीमारी का संबंध एक व्यक्ति पर शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से है।
क्योंकि जब भी हम किसी भी नशा करने वाले व्यक्ति से बात करते हैं, तब वह भी यही कहता है, कि नशा बहुत बुरी चीज़ है, इससे उसको बहुत नुकसान हो रहा है, और वह इसको छोड़ देगा।
क्योंकि यह एक ऐसी संगत में है, जहां जब यह तंबाकू पदार्थ का सेवन नहीं करता है, तब इसके दोस्त इसको तंबाकू पदार्थ का सेवन करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
जो लोग इस व्यक्ति के आसपास होते हैं, वह सबसे बड़े मुजरिम है, क्योंकि वही इसको लोग नशा करने के लिए एक दूसरे को उकसाते हैं।
इसलिए ऐसे व्यक्ति के साथ हमदर्दी के साथ हमें पेश आना चाहिए, उसके साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए, इस पूरी साइकोलॉजी को समझना हम लोगों के लिए बेहद जरूरी है, खास तौर पर इस व्यक्ति के परिवार वालों के लिए।
इसके साथ ही हमें सरकारों के भरोसे पर नहीं रहना चाहिए कि वह सामाजिक बुराइयों को प्रतिबंधित करेगी या नहीं करेंगे।
बल्कि हमें एक अच्छा साफ सुथरा जीवन जीना चाहिए, क्योंकि हम सामाजिक बुराइयों की बारिश को तो नहीं रोक सकते हैं, लेकिन नैतिकता का छाता लेकर खुद को ज़रूर बचा सकते हैं।