हमारा भारत त्योहारों का देश है, हमारे देश के लिए कहा जाता है, India Is A Land Of Festivals.
हमारे भारत में दुनिया में बसने वाले अधिकतर धर्म और जाति और भाषा के लोग रहते हैं, जिन सभी के अलग-अलग त्योहार हैं।
त्योहार हम इंसानों के लिए प्रेम और भाईचारा लेकर आते हैं, और हम इन त्योहारों के मौके पर बेहद खुश होते हैं, और एक दूसरे के साथ खुशियां बांटते हैं।
हमारे भारत में अनेक धर्म और जाति, और भाषा का इस्तेमाल करने वाले लोग रहते हैं, लेकिन हम भारतवासी मिलकर एक दूसरे के साथ रहते हैं, "अनेकता में एकता" हमारी पहचान है।
क्या कभी हमने सोचा कि इन त्योहारों से हमको खुशियों के साथ-साथ और क्या-क्या मिलता है, क्या आप जानते हैं, इन त्योहारों से हमें आर्थिक और सामाजिक लाभ मिलते हैं।
इन त्योहारों के ज़रिए हमारे भारत वासियों को कई तरह का फायदा मिलता है, इससे हमारा व्यापारी वर्ग और व्यापार सक्षम होता है, जिससे हमारी इकोनॉमी मज़बूत होती है।
अगर हम भारत को मज़बूत बनाना चाहते हैं, तो हमें अपने व्यापार को मज़बूत बनाना होगा, और छोटे-छोटे व्यापारों के ज़रिए यह क्रांति संभव है।
तो अब हम भारत के एक ऐसे ही त्यौहार के संबंध में कुछ बातें करते हैं।
तो हमारे भारत में मुस्लिम भाइयों का एक त्यौहार है, जिसे बकरा ईद (Eid Ul Adha) कहा जाता है, वो जल्द ही आने वाला है।
इस त्यौहार से हमारे भारत में क्या क्या आर्थिक और सामाजिक फायदा होता है, उस संबंध में मैं आपसे जानकारी साझा करना चाहता हूं।
और इस पूरे एपिसोड हम यह देखेंगे, कि इस त्योहार से इंडिया को कितना रेवेन्यू प्राप्त होता है।
गूगल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार भारत में बकरा ईद (Eid Ul Adha) पर एक करोड़ जानवर कुर्बान किए जाते हैं, और एक जानवर की एवरेज कीमत 15000 होती है।
और 2000 रुपए मिसलेनियस खर्चे होते हैं, जिसमें ट्रांसपोर्टेशन के, कसाई के, छुरी और पत्ती, चारे और भूसे के इसमें शामिल है।
तो यह पूरा त्योहार इंडियन इकॉनमी को लगभग ₹170 अरब रुपए देता है, शायद ही इतना देसी कोई त्यौहार है, जिसमें हर एक चीज़ भारत की मिट्टी से जुड़ी हुई है, कोई दूसरा त्यौहार होता हो।
और शायद ही इतना बड़ा रेवेन्यू किसी और इंडियन फेस्टिवल से भारत सरकार को प्राप्त होता है,
बकरा ईद (Eid Ul Adha) इंडियन इकॉनमी के लिए यह सबसे बड़ा त्योहार है, सबसे बड़ा बूस्ट है, आइए इस के कुछ और फायदे जानते हैं।
पशुधन भारत में यह परंपरा सदियों पुरानी है, बल्कि पूरी दुनिया में ही यह परंपरा है, जहां लोग एक साइड बिजनेस या मेन बिजनेस के तौर पर जानवरों को पालते हैं।
और फिर बकरा ईद (Eid Ul Adha) के मौके पर उनको बेचते हैं, इस व्यापार को ज्यादातर नॉन मुस्लिम भाई करते हैं।
इस त्यौहार का सबसे बड़ा फायदा ग्रॉसरी स्टोर्स को होता है, क्योंकि हर घर में बहुत अच्छा खाना पकाया जाता है,
अपने पड़ोसियों रिश्तेदारों की दावत की जाती है, इसके साथ ही सब्ज़ी वालों को भी इसका बहुत बड़ा फायदा होता है।
एक व्यापारी वर्ग पेड़ों में लगी हुई पत्तियों, चारा और भुसा बेचने वालों को और जो भी, इन जानवरों की खुराक के लिए चीज़ें बेचते हैं।
एक जगह से दूसरी जगह जानवरों को लाने ले जाने के लिए ट्रांसपोर्टेशन की जरूरत पड़ती है।
इससे ट्रांसपोर्टेशन का व्यापार करने वालों को काफी फायदा होता है।
इस त्यौहार में कुछ व्यापारी छुरियों में धार लगाने के लिए या नई छुरिया बेचते है।
इस पूरे बिजनेस को भी साल में एक बार इन दिनों में बहुत बड़ा बूस्ट मिलता है।
अक्सर घरों में कसाई जानवरों की कुर्बानी के लिए आता है, इन लोगों को भी साल में एक बार बहुत कम मिलता है,
और अक्सर ईद के दिन और उसके दूसरे दिन इनकी शॉर्टेज हो जाती है।
इन जानवरों की खालों को बेचा जाता है, इन खालों से तमाम तरह के लेदर प्रोडक्ट्स बनाए जाते हैं,
इससे भी इस काम में लिप्त व्यापारियों को बहुत फायदा होता है, इंडिया खालो का एक बहुत बड़ा एक्सपोर्टर है।
इस त्यौहार का सामाजिक फायदा यह है, यह पूरे समाज को जोड़ता है, इसमें जब गोश्त बांटा जाता है, तो मुस्लिम और नॉन मुस्लिम का फर्क नहीं किया जाता,
कि इसमें जिन जानवरों की कुर्बानी की जाती है, उसमें गरीबों का, मिस्कीनों का, मोहताजों का, पड़ोसियों का, रिश्तेदारों का, भी हिस्सा होता है,
इस दिन जो भी हमारे घरों में आता है, या जिसको हम जानते हैं, उस तक बहुत ही फिक्र और इज्जत के साथ कुर्बानी का गोश्त देते हैं,
ताकि वह भी एक या दो वक्त अच्छे से खुश होकर खाना खा सकें,
गोश्त को खानों का राजा कहा जाता है, और इसको खाकर इंसान को अत्यंत आनंद की अनुभूति होती है।
इस दिन कुछ लोग इज्तेमाई कुर्बानी करते हैं, और भारत में उन जगहों पर जहां गरीबी बहुत ज्यादा है, तो जो साधन संपन्न लोग हैं,
ऐसे गांव और शहरों में कुर्बानी करने के लिए पैसा देते हैं, ताकि हमारे से जो सैकड़ो और हजारों किलोमीटर दूर लोग हमारे वतन में बसते हैं, वह भी इस दिन खुश हो सके, अच्छा खाना खा सकें।
इस दिन एक विदेशी संगठन अचानक से इस त्यौहार के एक दिन पहले अंडरटेकर की तरह दिखाई देते हैं, और 365 दिन का पशु प्रेम कैमरे के सामने निचोड़ देते हैं, इस संगठन का नाम PETA है।
बकरा ईद (Eid Ul Adha) पर करोड़ों मुसलमान बहुत ही शांतिप्रिय तरीके से नमाज़ अदा करने के लिए एक रास्ते से ईदगाह जाते हैं।
और बहुत ही शालीनता के साथ दूसरे रास्ते से वापस अपने घरों में वापस आ जाते हैं।
पुलिस को प्रशासन को आम लोगों को 1 मिनट के लिए भी तरह की कोई परेशानी दोनों ही ईदो (Eid Ul Fitr और Eid Ul Adha) में नहीं होती है, वरना तो जितने भी त्योहार आते हैं,
उसमें पुलिस को, प्रशासन को, और आम लोगों को, बेहद परेशानियों का सामना कई कई दिनों तक करना पड़ता है।
तो यह कुछ बातें इस त्यौहार के संबंध में थी , मुझे उम्मीद है, यह जानकारी आपको रोचक लगी होगी।