भोपाल। राजधानी में गणेश प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान हुई पत्थरबाजी और प्रतिमा खंडित होने की घटना ने नया मोड़ ले लिया है। शुक्रवार को मुस्लिम समाज ने जिंसी चौराहे पर ज़ोरदार प्रदर्शन करते हुए खेल मंत्री विश्वास सारंग और हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा के इस्तीफे तथा हिंदू उत्सव समिति अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी की गिरफ्तारी की मांग की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने तीनों नेताओं के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि भाजपा नेताओं ने घटना को लेकर बिना सबूत मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया और बयानबाजी से धार्मिक भावनाओं को भड़काने का प्रयास किया। मोहम्मद माज़ कुरैशी ने कहा कि “सरकार को मंत्री विश्वास सारंग और विधायक रामेश्वर शर्मा से इस्तीफा लेना चाहिए और चंद्रशेखर तिवारी को गिरफ्तार करना चाहिए। ये लोग लगातार मुसलमानों को निशाना बनाकर नफरत की राजनीति कर रहे हैं।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मूर्ति खंडित मामले में जिन युवकों पर एफआईआर हुई, वे घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं थे। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई तो समाज का भरोसा सरकार और प्रशासन से उठ जाएगा।
घटनाक्रम कैसे बढ़ा?
घटना 8 सितंबर की रात करीब 9:15 बजे आरिफ नगर से डीआईजी बंगला जा रहे गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान हुई। अचानक पत्थर फेंके गए, जिससे प्रतिमाएं खंडित हो गईं। इससे गुस्साए लोगों ने गौतम नगर थाने का घेराव किया और तत्काल कार्रवाई की मांग की।
पहले दिन एफआईआर दर्ज हुई, दूसरे दिन भाजपा नेताओं ने बयान दिए, और तीसरे दिन पुलिस जांच में नए तथ्य सामने आए। सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय लोगों से पूछताछ में आरोपियों की मौजूदगी की पुष्टि नहीं हुई, जिससे फरियाद और साक्ष्यों में विरोधाभास उजागर हुआ। इसी पृष्ठभूमि में शुक्रवार को मुस्लिम समाज का बड़ा प्रदर्शन हुआ।
नेताओं के बयान
विश्वास सारंग (मंत्री) ने कहा था - “यदि कोई शांति भंग करेगा तो ऐसी सख्त कार्रवाई होगी जो नजीर बनेगी। आरोपी चाहे कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा।”
रामेश्वर शर्मा (विधायक) ने कहा था - “यह बिरयानी खिलाने वालों की सरकार नहीं है। जो शांति भंग करेगा, उस पर प्रशासन खतरनाक तरीके से कार्रवाई करेगा।”
पुलिस का बयान
एडिशनल डीसीपी शालिनी दीक्षित ने कहा कि प्रारंभिक जांच में पत्थरबाजी की घटना की पुष्टि नहीं हुई। जिन नामजद आरोपियों पर एफआईआर दर्ज की गई थी, उनकी घटना स्थल पर मौजूदगी नहीं मिली। जबकि तीसरे आरोपी की अब तक पहचान नहीं हो पाई है।
कुल मिलाकर, गणेश विसर्जन की इस घटना ने राजनीतिक और सामाजिक तनाव को और गहरा कर दिया है। जहां भाजपा नेताओं ने सख्त कार्रवाई की बात कही है, वहीं मुस्लिम समाज भाजपा नेताओं की बयानबाजी को पक्षपातपूर्ण मानते हुए उनके इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग पर अडिग है'