आज बात एक सरकारी योजना के संबंध में जो कि भारत सरकार द्वारा 23 सितंबर 2018 को लागू की गई, जिसका नाम "आयुष्मान भारत योजना" या "प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना" है।

इसमें आर्थिक रूप से कमजोर 10 करोड़ बीपीएल धारक जोकि बीपीएल (Below Poverty Line) जिसमें लगभग 50 करोड लोग कवर होंगे, उनके लिए यह स्वास्थ्य संबंधी सेवा शुरू की गई है। 

जिसके तहत "आयुष्मान भारत योजना" का कार्ड धारक सरकार द्वारा चयनित और मान्यता प्राप्त प्राइवेट अस्पताल से 5 लाख रुपए तक उसका फ्री इलाज करवा सकता है।

क्योंकि अब बीमारियां काफी बढ़ती जा रही हैं, और हर घर में कोई ना कोई बीमार है, और अचानक से किसी भी व्यक्ति को कोई भी बड़ी बीमारी निकल जाती है। 

तो इस योजना के तहत अक्सर उन्हीं बड़ी बीमारियों को शामिल किया गया है, ताकि "आयुष्मान भारत योजना" के द्वारा गरीबों के ऊपर इलाज का जो भार पड़ता है, उस भार से उनको मुक्ति दिलवाई जा सके।

क्योंकि एक सर्वे के अनुसार भारत में लगभग 75% मध्यम वर्गीय परिवार एक ही अस्पताल बिल के कारण गरीबी में चले जाने के खतरे में आ जाते हैं।

इसके साथ ही भारत में मेडिकल खर्चों पर जो खर्च होता है, उसका 67% दवाएं खरीदने में होता है।

जबकि यूनाइटेड स्टेट में 90% जेनेरिक दावों का इस्तेमाल किया जाता है, जो मेडिकल खर्चों का 18% होता है।

हालांकि भारत में "प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना" है, जिसके तहत जेनेरिक दावों के द्वारा ट्रीटमेंट किया जाता है, लेकिन अब भी डॉक्टर अधिकतर एथिकल दवाएं ही मरीज़ के लिए लिख रहे हैं।

खैर भारत में सिर्फ 5 सालों में लगभग 30 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं, और लक्ष्य 50 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाने का है, तो 2027 तक इस लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। 

मध्य प्रदेश 3 करोड़ 80 लाख आयुष्मान कार्ड बनाकर भारत में दूसरे नंबर पर है, उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा आयुष्मान कार्ड बनाएं जा चुके हैं। 

मुझे लगता है, इस डाटा को इस तरह से देखने की आवश्यकता है, कि किस राज्य में बीपीएल कार्ड धारक कितने हैं, और उसकी तुलना में कितने प्रतिशत लोगों के अब तक आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। 

इस तरह से डाटा को समझ कर, हमें सही स्थिति का ज्ञान हो सकेगा, कि हमारे  राज्य में कितने प्रतिशत लोग इस योजना से जुड़ चुके हैं। 

क्योंकि जिस राज्य में जनसंख्या अधिक है, वहां पर कार्ड धारकों की संख्या भी अधिक होगी।

हालांकि मध्य प्रदेश में बहुत ही कम समय में 70 साल से अधिक आयु वाले बुजुर्गों के 2 लाख आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं, इसमें सरकार ने सिर्फ आयु सीमा को मान्यता दी है, उनकी आर्थिक स्थिति को नहीं।

यह भी एक बड़ी अजीब विडंबना है, कि सरकार लोगों के फायदे के लिए उनकी स्थिति को देखते हुए योजनाएं लाती है, लेकिन जिन लोगों को इसका फायदा मिलना चाहिए, वह इन योजनाओं से बेखबर रहते हैं। 

जबकि हर वार्ड में, हर गांव में अब एमपी ऑनलाइन की शॉप्स उपलब्ध है, जहां पर बड़ी ही आसानी से सभी तरह की सरकारी योजनाओं का लाभ उठाया जा सकता है, इसके अलावा सरकारी विभाग मौजूद हैं।

जहां इन योजनाओं के संबंध में पूरी जानकारी दी जाती है, और सभी तरह की प्रकिया पूरी करवाई जाती है।

बीपीएल कार्ड धारकों के साथ एक बड़ी समस्या यह है, कि वह नशीले पदार्थों पर तो खूब पैसा खर्च करते हैं, लेकिन जैसे ही कोई सरकारी योजना में थोड़े से भी पैसे फीस के रूप में देने की बारी आती है, तो वह एकदम गरीब बन जाते हैं। 

वह मामूली सी फीस जो सरकार द्वारा मांगी जाती है, वह भी देने में खुद को असमर्थ सिद्ध करने का हर संभव प्रयास करते हैं, जो कि सरासर गलत है। 

मानव सेवा से जुड़े सभी संगठन इस समस्या का सामना करते हैं, कि जब किसी बीपीएल कार्ड धारक का इलाज उनको करवाना होता है, तो उस व्यक्ति के पास आयुष्मान कार्ड ही नहीं होता।

फिर मजबूरी के तहत उस बीमार व्यक्ति के लिए, घर वालों को अस्पताल की फीस जमा करने के लिए लोगों से उधार पैसे लेना पड़ता है या ब्याज पर पैसा लेना पड़ता है, या फिर कोई चीज़ बेचनी पड़ती है।

इस वर्ग को सरकार पढ़ाई के लिए भी बहुत स्कॉलरशिप देती हैं, लेकिन यह  लापरवाही की वजह से अपने बच्चों को शिक्षा से वंचित रखते हैं। 

जबकि सरकार की बहुत सारी योजनाएं ऐसी हैं, जिनके तहत बीपीएल कार्ड धारकों को फ्री शिक्षा दी जा रही हैं, लेकिन अगर जिस व्यक्ति को आवश्यकता है, और वह सिर्फ आसान सी कागज़ी कार्यवाही को पूरी न कर पाए, तो सरकार भी उसके लिए क्या ही कर सकती है।

इसलिए बीपीएल कार्ड धारकों को सरकारी योजनाओं के संबंध में जानकारी एकत्र करना चाहिए, और जिस योजना के अंतर्गत वह आते हैं, उन्हें उस योजना का लाभ लेना चाहिए।

क्योंकि सभी सरकारी और ग़ैर सरकारी योजनाएं समाज में मौजूद कमजोर वर्ग, और उनके परिवारो को अपलिफ्ट करने के लिए चलाई जाती हैं, ताकि एक बेहतर समाज का निर्माण किया जा सके।

इसके लिए मानव सेवा करने वालों संगठनों को आगे आकर, और जो लोग राजनीतिक तौर पर सक्रिय हैं, उनको इन कमजोर वर्ग की कागजी कार्यवाही को पूरा करने में मदद करना चाहिए। 

और ऐसा पहले किया भी जाता था, लेकिन अब कोई भी राजनीतिक तौर पर सक्रिय व्यक्ति चुनाव में वोटिंग की पर्ची देने के अलावा नहीं दिखाई देता और जो पार्षद हैं, अक्सर उनको भी इन सब बातों से कोई सरोकार नहीं है।

इसके साथ ही जो पढ़े-लिखे रिश्तेदार या पड़ोसी हैं, वह अपने अपने आसपास लोगों का ख्याल कर लें, और जो कमज़ोर वर्ग है, उनके डॉक्यूमेंट कंप्लीट करवा ले, यह बड़ा ही पुण्य का काम है।

इसके साथ ही धार्मिक स्थलों में इस तरह के कैंप किए जाएं, जहां पर इस कमज़ोर वर्ग की हर तरह से मदद की जाए।

हमें अपने परिवार रूपी राज्य के विकास के लिए कमजोर वर्ग का हाथ थामने की ज़रूरत है।