(हिमाचल प्रदेश), 23 अगस्त 2025:

नेशनल स्पेस डे पर हिमाचल के एक स्कूल में बच्चों से बातचीत के दौरान सांसद अनुराग ठाकुर ने पूछा –

“दुनिया का पहला अंतरिक्ष यात्री कौन था?”

बच्चों ने उत्तर दिया – “नील आर्मस्ट्रांग।”

इस पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा – “नहीं, सबसे पहले तो हनुमान जी अंतरिक्ष यात्री थे।”

धार्मिक संदर्भ

अनुराग ठाकुर का यह कथन किसी वैज्ञानिक तथ्य को बदलने के लिए नहीं था, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा की ओर संकेत था। रामायण में हनुमान जी का “आकाश मार्ग से लंका जाना” एक प्रतीकात्मक यात्रा है, जिसे वे बच्चों से साझा कर रहे थे।

वैज्ञानिक सत्य

इतिहास और विज्ञान के अनुसार –

यूरी गगारिन (1961, सोवियत संघ) पहले व्यक्ति थे जिन्होंने अंतरिक्ष की यात्रा की।

नील आर्मस्ट्रांग (1969, अमेरिका) पहले व्यक्ति बने जिन्होंने चंद्रमा पर कदम रखा।


समाज के लिए संदेश

यह घटना हमें दो अहम बातें सिखाती है:

1. संस्कृति और विज्ञान दोनों की समझ जरूरी है। परंपराएँ हमें प्रेरणा देती हैं, और विज्ञान हमें सत्य और प्रगति का मार्ग दिखाता है।


2. बच्चों को जिज्ञासा और प्रश्न पूछने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। तभी वे इतिहास और विज्ञान दोनों को संतुलन के साथ समझ पाएंगे।



 सही संदेश यह है कि हमें अपनी धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करना चाहिए, लेकिन साथ ही वैज्ञानिक तथ्यों को भी स्पष्ट रूप से समझना और स्वीकारना चाहिए।