आज हम जिस विषय पर बात करेंगे, वह हमारे समाज से जुड़ा हुआ है, और सामाजिक होने की वजह से यह है दिन में कई बार हमारे सामने आता है, और बहुत हद तक यह बात हमारे नैतिक रूप से अच्छे या बुरे होने की एक पहचान के रूप में देखी जाती है।

तो हम बात करेंगे, गाली गलौज के बारे में सबसे पहले हम देखेंगे की गाली कहते किसको हैं, गाली का अर्थ है, एक व्यक्ति द्वारा दूसरे किसी व्यक्ति की बुराई या बे-इज़्ज़त करने के लिए किसी शब्द या वाक्य का इस्तेमाल करना , जहां एक दूसरे को नीचा दिखाना और एक दूसरे को ठेस पहुंचाना मकसद है, सबसे हैरानी की बात यह है, कि जितनी भी गालियां सारी दुनिया में दी जाती है, उसमें नारी अस्मिता को टारगेट किया जाता है, जबकि अक्सर लड़ाई पुरुषों में हो रही होती है।

तो सन 2014 में सुनील जागलान नामक एक व्यक्ति ने "गाली बंद घर अभियान" शुरू किया, जिसमें हमारी बोलचाल के बीच में गली के इस्तेमाल को खत्म करने की कोशिश की गई, इसी संस्था द्वारा किए गए एक सर्वे के अनुसार 2025 में पाया गया, कि देशभर में 80% लोग रोज़मर्रा की बातचीत में गाली-गलौज का इस्तेमाल करते हैं।

भारत में पांच ऐसे राज्य जहाँ सबसे अधिक गालियाँ दी जाती हैं, वह टॉप 5 राज्य जहाँ लोगों का गाली-प्रयोग सबसे ज्यादा है, साथ ही उनका शिक्षा स्तर (Literacy Rate) भी:

राज्य में गाली का % और इन राज्यों मे शिक्षा स्तर (Literacy Rate)

दिल्ली 80% शिक्षा स्तर 88.7%
पंजाब 78% शिक्षा स्तर 83.7%
उत्तर प्रदेश 74% शिक्षा स्तर 73%
बिहार 74% शिक्षा स्तर 74.3%
राजस्थान 68% शिक्षा स्तर 75.8%
महाराष्ट्र 58% शिक्षा स्तर 82.34 %
 

गाली-गलौज का प्रयोग कई विकसित राज्यों/शहरी क्षेत्रों में भी होता है, उदाहरण: दिल्ली और पंजाब में Literacy Rate अधिक है,  लेकिन फिर भी गाली गलौज सबसे ज्यादा की जाती है।

इस बात से यह साबित होता है, कि शिक्षा की गुणवत्ता, सामाजिक मान्यताएं, और भाषाई संस्कार गाली-प्रयोग को प्रभावित करते हैं, न केवल Literacy Rate.

वहीं भारत में सबसे कम गालियां देने वाला राज्य जम्मू कश्मीर है, जहां सिर्फ 15% गालियां दी जाती है, जम्मू कश्मीर में गाली गलौज के कम इस्तेमाल होने की एक बड़ी वजह धार्मिक और सांस्कृतिक अनुशासन और पारंपरिक शालीनता है।

इसके साथ ही अगर हम धार्मिक शिक्षा का अध्ययन करें, तो हम पाएंगे कि सभी धर्मों में गाली गलौज को सख्ती के साथ प्रतिबंधित किया गया है, और गाली गलौज करने वाले व्यक्ति को धार्मिक दृष्टि से बहुत ही तुच्छ और निम्न स्तरीय व्यक्ति साबित किया गया है, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एक व्यक्ति सिर्फ उसकी बातचीत और कर्मों से ही महान है।

जबकि हमारे बीच में कुछ लोग ऐसे हैं, जो कि गुस्से में नहीं, बल्कि अब एक दूसरे के बीच में अपनापन और मोहब्बत दिखाने के लिए गंदी-गंदी गालियों का इस्तेमाल एक दूसरे के लिए करते हैं, और सख्त अफसोस की सार्वजनिक स्थलों पर गलियों का इस्तेमाल करते हैं, और ये लोग इस बात पर ध्यान तक नहीं देते हैं, कि उनके आसपास बच्चे, बुज़ुर्ग या महिलाएं हैं।

हमारे भोपाल की स्थिति भी इस मामले में बहुत खराब है, जहां अक्सर लोग गाली गलौज का इस्तेमाल करते हैं, और उनको इस बात का अंदाज़ा ही नहीं होता, कि वह गालियों का इस्तेमाल कर रहे हैं, सख्त अफसोस हमारे यहां गाली गलौज बातचीत का हिस्सा बन गया है, इसीलिए अगर हमारे सर्कल में कोई गाली गलौज का इस्तेमाल करता है, तो हमें उसे बहुत ही प्यार से समझाना चाहिए, कि भाई आप अपनी ज़बान को क्यों गंदा कर रहे हैं, इससे आपका व्यक्तित्व खराब हो जाएगा, आपकी सोच खराब हो जाएगी। 

इस सामाजिक बुराई को हमारे समाज में से दूर करने के लिए सरकार को भी, स्वयंसेवी संगठनों को भी, धार्मिक गुरुओं को भी, लोगों को समय-समय पर यह समझाना चाहिए, कि उनको गाली गलौज का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

अब हम जानते हैं, कि गाली देने के आरोप क्या कानून है, भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 504, 294, और 354 के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है, भारतीय कानून में सार्वजनिक स्थानों पर दी गई गाली, एक दंडनीय अपराध है, जो भारतीय दंड संहिता की धारा 294 के तहत आता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में दोनों पक्ष राजीनामा कर सकते हैं, क्योंकि यह एक नॉन-कॉग्निजेबल अपराध है, और पुलिस FIR दर्ज कर सकती है, लेकिन फिर भी इसमें राज़ीनामे की गुंजाइश होती है।