आज मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेशवासियों के लिए बहुत ही नायाब कदम उठाया है, और यह कदम प्रदेशवासियों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है, अगर इस पर अमल किया जाए।

तो हम बात कर रहे हैं, एक जागरूकता अभियान की जोकि "नशा मुक्त समाज" के बारे में है, जहां आज मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव ने कहा, कि मध्यप्रदेश सरकार नशामुक्त समाज बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, और इसी कड़ी में मध्यप्रदेश पुलिस 15 जुलाई से 30 जुलाई 2025 तक 'नशे से दूरी है जरूरी' नशामुक्ति अभियान चलाने जा रही है।

इस अभियान में पुलिस व प्रशासन के साथ ही स्कूल, कॉलेज, पंचायत, नगरीय निकाय, सामाजिक संस्थाएं, जनप्रतिनिधि, मीडिया और आमजन भी सहभागी बनकर नशे के प्रति जागरूकता प्रसारित करने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

आंकड़ों के अनुसार सभी तरह के नशे से देश भर में लाखों मौतें होती हैं, इसलिए मध्य प्रदेश सरकार का यह कदम इंसानियत के लिए बेहद ज़रूरी और काबिल ए तारीफ है, क्योंकि सभी तरह के अपराधों की जड़ नशा ही है, क्योंकि एक व्यक्ति जब नशे में होता है, तो वो उसका होश खो बैठता है, तब ऐसा व्यक्ति कुछ भी कर सकता है, या उससे कुछ भी करवाया जा सकता है, आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं, कि हमारे समाज में जब-जब नशा बढ़ता है, तब तब अपराध का ग्राफ भी तेज़ी से बढ़ता जाता है।

तो जैसा कि हम सभी को समाचार पत्रों और वीडियो के द्वारा मालूम हुआ, कि नशे के संबंध में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जैसा कि हम सभी जानते हैं, कि सरकारी आदेशों के अनुसार सभी नशावर पदार्थ पर उसको ग्रहण करने से होने वाले नुकसानों के बारे में उस पदार्थ के पैकेट में बताया जाना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसका पालन नशीला पदार्थ बेचने वाली कंपनियां कर भी रहीं है, जिसके तहत तंबाकू से बने हुए पदार्थ जैसे गुटके और सिगरेट के पैकेट पर तो बाकायदा कैंसर पीड़ित व्यक्ति का फोटो भी बनाया जाता है।

एक सवाल?

तो मेरा मध्यप्रदेश सरकार से सिर्फ यही प्रश्न है, कि एक व्यक्ति जो खुशी खुशी मौत का सामान खरीद रहा है, और खुशी से उसकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा नशे की लत में बर्बाद कर रहा है, और वह पैकेट पर भी इन पदार्थों के सेवन करने का अंजाम देख रहा है, तो ऐसे व्यक्ति को जागरूक किस तरह किया जाएगा, क्योंकि ऐसा बिल्कुल नहीं है, कि कोई भी व्यक्ति जो नशीले पदार्थों का सेवन करता है, वह इन पदार्थों के नुकसानों से अनजान है, जबकि वह भी बखूबी जानता है, कि इन पदार्थों का सेवन करने की वजह से उसको क्या-क्या परेशानियां और बीमारियां हो सकती हैं।

तो ऐसे व्यक्ति को जागरूक किस तरह से किया जा सकता है???

खैर हमारे यहां बड़े बुज़ुर्गों के द्वारा यही सीख दी जाती है, कि हमें सकारात्मक तरीके से अपने करीबी लोगों को अच्छे कामों की तरफ बुलाना चाहिए, और बुरे कामों से रोकने की भी हर संभव कोशिश करना चाहिए, क्योंकि किसी भी अच्छी बात का कभी भी किसी पर भी सकारात्मक असर हो सकता है, और उसकी जिंदगी की दशा और दिशा दोनों ही बदल सकती है, और ऐसे अनगिनत उदाहरण मौजूद भी हैं, जहां लोगों ने सामाजिक बुराइयों को एकदम से छोड़ चुके हैं।

इसके साथ ही हम मध्य प्रदेश सरकार से यह अपील करते हैं, कि वह प्रदेश हित में, बल्कि सारे संसार के हित में सभी तरह के नशीले पदार्थों को प्रतिबंधित कर एक मिसाल कायम करे, ताकि समाज को इस स्लो पॉयज़न से मुक्ति मिल सके, इस नेक कदम के द्वारा लोगों के घर बर्बाद होने से बच सके, औरतें बेवा होने से बच सके, बच्चे यतीम होने से बच सके।

यहां बेशक सरकारों के सामने एक चैलेंज यह आता है, कि सभी सरकारों को एक बड़ा रेवेन्यू नशीले पदार्थों की वजह से प्राप्त होता है, कहीं नशीले पदार्थों को प्रतिबंधित करने की वजह से प्रदेश को आर्थिक नुकसान ना हो, लेकिन सरकारों को ऐसा बिल्कुल नहीं सोचना चाहिए, क्योंकि जब भी हम किसी बुराई को रोकते हैं, तो हम ऐसा देखते हैं, कि उसका हमारे समाज पर बेहद सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, और उन्नति के द्वार खुलते हैं, और खुशहाली आती है।

जैसा की मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव ने बताया कि उन्होंने 19 धार्मिक स्थलों के आस उस जगह को नशा मुक्त कर दिया है,  जो कि बेहद ही सराहनीय फैसला है, लेकिन सार्वजनिक स्थलों से ही नशीले पदार्थ की दुकानों को हटाकर कहीं और शिफ्ट कर देना चाहिए, क्योंकि इसकी वजह से आम लोगों को बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

इसके साथ ही अब ऐसा देखने में आ रहा है, कि जिन दुकानों में खाद्य पदार्थ मिलते हैं, जैसे किराना दुकान, डेरी और प्रोटीन शॉप वहां पर भी गुटका, तंबाकू, बीड़ी और सिगरेट धड़ल्ले से खुलेआम बिक रहे है, जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हमारे घरों के छोटे बच्चे भी इन दुकानों पर जाते हैं, और वह बार-बार इन चीज़ों को देखते हैं, तो कहीं ना कहीं उनके मन में भी इन पदार्थों के सेवन के प्रति उत्सुकता बढ़ती है, इसलिए छापामार कार्रवाई कर इन दुकानों पर चालानी और दंडात्मक कार्यवाही करना चाहिए।

अक्सर ऐसा देखने में आता है, कि नशा परिवार के मुखिया के जीवन को तो लील ही जाता है, लेकिन उस परिवार के बच्चों की पढ़ाई को भी निगल जाता है, फिर बिन बाप के बच्चे छोटे-छोटे काम करते हैं, और बुरे लोगों की संगत और सोहबत में पड़ जाते हैं, और नशे की लत में गिरफ्तार हो जाते हैं, और नशे की लत को पूरा करने के लिए बहुत थोड़े पैसों की वजह से यही बच्चे बड़े अपराधी बन जाते हैं।

इस जागरूकता अभियान में धार्मिक गुरुओं को भी शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि हम भारतवासियों पर अपने धार्मिक गुरुओं के द्वारा कही गई बात का काफी गहरा असर पड़ता है।

इसके साथ ही नशा करने वालों के साथ परिवार वालों को और करीबियों को अच्छा व्यवहार करने की ज़रूरत है, उनको समझने की ज़रूरत है, और नशा करने वाला हर व्यक्ति नशे को छोड़ना चाहता है, लेकिन जब वह नशे का आदी हो जाता है, तो नशा किए बिना, उसके शरीर में जो परेशानियां उत्पन्न होती हैं, उसको भी ध्यान में रखना ज़रूरी है, क्योंकि किसी भी लत को एकदम से नहीं छुड़वाया जा सकता है, लेकिन धीरे-धीरे उसको कम करके खत्म ज़रूर किया जा सकता है, इसके लिए परिवार वालों और करीबियों को नशा करने वालों के साथ हमदर्दी और अपनेपन से पेश आने की ज़रूरत है।

क्योंकि आग को पानी के द्वारा ही बुझाया जा सकता है, कभी भी आग को आग के द्वारा नहीं बुझाया जा सकता।

इसके साथ ही हर व्यक्ति उसके द्वारा किए गए अच्छे और बुरे के अंजाम का ज़िम्मेदार होता है, और उसके द्वारा किया गया कोई भी सही या गलत काम उसको और उसके पूरे परिवार के लिए फायदेमंद या नुकसानदेह साबित होता है, इसलिए अगर हम बारिश होने से नहीं रोक सकते हैं, तो खुद को छाता लेकर सामाजिक बुराइयों से बचा सकते हैं।

अंत में सिर्फ इतना ही कि सामाजिक बुराइयों में एक बड़ी ही अच्छी बात कही जाती है, कि एक व्यक्ति घर से निकला, तो उसके घर के बाहर केले का छिलका पड़ा हुआ था, तो उसने अपने दोस्त से कहा "मुझे आज फिर फिसलना पड़ेगा" जबकि वह व्यक्ति उस केले के छिलके पर पैर रखे बिना भी निकल सकता था, ठीक ऐसे ही सामाजिक बुराइयां हमारे समाज में मौजूद है, लेकिन हमें खुद भी उनसे बचना है, अपने परिवार के लोगों को भी बचाना है, और करीबी लोगों को भी बचाना है।


लेखक इमरान उज़ ज़माँ 
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