लखनऊ, 31 जुलाई — हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। आमतौर पर मीडिया में व्यवस्था की खामियाँ सामने लाना हमारी प्राथमिकता होती है, लेकिन जब कोई सकारात्मक पहल हो, तो उसे उजागर करना भी उतना ही ज़रूरी है।


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आज लखनऊ के हजरतगंज क्षेत्र में बड़ी संख्या में मूकबधिर नागरिक अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने पहुंचे। चूँकि ये प्रदर्शनकारी ना सुन सकते थे और ना ही बोल सकते थे, ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती पुलिस के सामने यह थी कि उनसे संवाद कैसे स्थापित किया जाए।

इस संवेदनशील स्थिति में हजरतगंज के इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने एक अनुकरणीय पहल करते हुए वीडियो कॉल के माध्यम से एक ट्रांसलेटर को शामिल किया। ट्रांसलेटर की मदद से उन्होंने मूकबधिर प्रदर्शनकारियों की बातों को न सिर्फ़ गंभीरता से सुना, बल्कि उनकी समस्याओं को समझकर शासन और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों तक भी पहुँचाया।

इंस्पेक्टर विक्रम सिंह की यह संवेदनशील और मानवीय पहल पुलिस व्यवस्था के उस पहलू को सामने लाती है, जो आमतौर पर सुर्खियों से दूर रह जाता है। प्रदर्शनकारियों ने भी पुलिस की इस सहयोगात्मक भूमिका की सराहना की।

यह घटना हमें याद दिलाती है कि संवाद केवल शब्दों का मोहताज नहीं होता — जब नीयत साफ़ हो और मंशा मदद की हो, तो रास्ते अपने आप निकल आते हैं।