आज बात एक ऐसे विषय पर जिसके बारे में हमें लगातार हर थोड़े समय में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से पढ़ते हैं।

"लव जिहाद" यह शब्द हम में से ज़्यादातर लोग सुनते हैं, आज हम इस शब्द का मतलब समझेंगे, उससे पहले हमें इस शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले कब और क्यों किया गया, इसके बारे में जानते हैं। 

2011 में एक हिंदू लड़की ने एक मुस्लिम युवक से शादी की, और 2017 में इस केस को बेस बनाकर, सबसे पहले इस शब्द का इस्तेमाल किया गया। 

दरअसल यह शब्द इंटर कास्ट मैरिज यानी कि अंतर जातीय विवाह के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जब कोई मुस्लिम युवक किसी हिंदू लड़की से उसकी सहमति से शादी करता है, क्योंकि शादी तो सहमति से ही होती है, तब कुछ राजनैतिक विचारधारा के लोगों द्वारा इसको इंटर कास्ट मैरिज ना बोलते हुए "लव जिहाद" का नाम दिया गया है। 

यह शब्द कानून की किसी किताब में वर्णित नहीं है, और ना ही इस शब्द का किसी अपराध के संबंध में कानूनी तौर पर इस्तेमाल होता है, यह शब्द एक विशेष राजनीतिक विचारधारा के द्वारा समाज को दिया गया है, जिसके द्वारा लोगों को हिंदू लड़कियों का मुस्लिम लड़कों से प्रेम या प्रेम विवाह को दर्शाता है।

हालांकि सख्त हैरानी है, कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा मर्द की मर्द से शादी और औरत की औरत से शादी समाज को एक्सेप्टेड है, लेकिन अगर कोई कानूनी तौर पर व्यस्क लड़की, उसकी मर्ज़ी से किसी लड़के को पसंद करती है, तो उनकी शादी पर बवाल किया जाता है।

वैसे इस समय कोई भी घटना हमारे देश में होती है, या विदेश में होती है, और अगर उसमें किसी मुस्लिम का नाम आ जाता है, तो सारी मुस्लिम कम्युनिटी को जाति के आधार पर उस घटना के संबंध में कटघरे में खड़ा किया जाता है, शब्द "लव जिहाद" भी इस्लामोफोबिया का ही हिस्सा है।

अभी भोपाल में ऐसा ही एक केस उजागर हुआ, जहां पर हिंदू लड़कियों का मुस्लिम लड़कों द्वारा शारीरिक शोषण किया गया, और जब उनमें से एक लड़के से पूछा गया, कि तुमने ऐसा क्यों किया, तो उसने कहा कि मैंने ऐसा मुसलमान होने के नाते किया।

तो आईए अब हम देखते हैं, कि जिस शब्द को इस्लाम से जोड़कर दिखाया जाता है, इस्लाम उस संबंध में क्या कहता है, इस्लाम में जो धर्मगुरु होते हैं, जिनको उलमा इकराम कहा जाता है, जो कुरान और हदीस के ज्ञाता होते हैं, वह इस संबंध में समय-समय पर जानकारी देते रहते हैं।

लव के मतलब तो हम सभी जानते हैं, कि इसका अर्थ प्यार होता है, जिहाद का अर्थ है, संघर्ष, प्रयास, या मेहनत, यह एक अरबी शब्द है, जिसका उपयोग इस्लाम में विभिन्न संदर्भों में किया जाता है, आमतौर पर, जिहाद का अर्थ होता है, सच्चाई और न्याय के लिए संघर्ष करना, या धार्मिक और नैतिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रयास करना।

इसमें ध्यान देने वाली बात यह है, कि सच्चाई और न्याय के लिए संघर्ष करना, लेकिन अगर कोई मुस्लिम युवक किसी हिंदू लड़की को धोखा देकर उसका शारीरिक शोषण कर रहा है, तो इस झूठ और धोखे का  जिहाद से क्या संबंध होगा?

इस्लाम शादी से पहले प्रेम (लव बिफोर मैरिज) के संबंध में बिल्कुल भी इजाज़त नहीं देता है, कि कोई भी मुसलमान लड़का किसी भी लड़की से चाहे वह मुस्लिम हो, हिंदू हो, सिख हो, ईसाई हो और कोई भी मुस्लिम लड़की किसी भी लड़के से चाहे वह, मुस्लिम हो, हिंदू हो, सिख हो, ईसाई हो, उससे प्रेम नहीं कर सकते हैं, बल्कि कुंवारे लड़का लड़की का आपस में बात करना भी हराम है, एक दूसरे को छूना या शारीरिक संबंध बनाना तो बहुत ही बड़ा गुनाह है।

आई अब हम देखते हैं, कि इस्लाम में ऐसा करने वालों की क्या सज़ा है, अगर कोई कुंवारे लड़का और लड़की आपसी सहमति से बिना शादी के शारीरिक संबंध बनाते हैं, तो इस्लामी कानून के तहत उनको सार्वजनिक स्थान पर 100 कोड़े मारे जाएंगे, और अगर कोई शादीशुदा मर्द और औरत आपसी सहमति से शारीरिक संबंध बनाते हैं, तो उनको सार्वजनिक स्थान पर कैपिटल पनिशमेंट यानी मृत्युदंड दिया जाएगा इससे समाज में व्यभिचार (Adultery) को बढ़ावा नहीं मिलता है।

इस्लाम लड़का और लड़की की परवरिश के बारे में माता पिता को सिखाता है, कि उनको अकेला नहीं छोड़ना चाहिए, उनकी निगरानी करना चाहिए, क्योंकि उम्र के एक दौर पर वह जज़्बातों से भरे होते हैं वह अच्छा बुरा नहीं समझते, और इसलिए भेड़ियों का शिकार बन जाते हैं, वैसे लोगों के साथ बुरा करने वालों का, कोई धर्म नहीं होता वह बुरे लोग होते हैं।

यहां पर हम केंद्र और राज्य सरकारो से अपील करेंगे, कि इस शब्द "लव जिहाद" को कानूनी तौर पर अपराध घोषित किया जाए, और इसका इस्तेमाल करने वालों पर, कठोर दंडात्मक कार्यवाही की जाए, क्योंकि जिहाद शब्द मुसलमानो की आस्था से जुड़ा हुआ है, और लोगों की आस्था का ख्याल करना सरकार का परम कर्तव्य है।

क्योंकि ऐसा नहीं है, कि सिर्फ हिंदू लड़कियां मुस्लिम लड़कों से शादी कर रही हैं, बल्कि एक बड़ी तादाद में मुस्लिम लड़कियां भी हिंदू लड़कों से शादी कर रही हैं, और बल्कि हमारे सामने ऐसे लगातार वीडियो आते हैं, कि मुसलमान लड़कियों को फसाने, उनके साथ शादी करने के लिए कुछ लोग और संगठन इनाम घोषित करते हैं।

अगर कोई मुस्लिम लड़की किसी हिंदू लड़के से शादी करेगी, तो क्या इसको अगर कोई यह बोले कि यह "लव धर्म युद्ध" है, तो क्या हिंदू इस शब्द को स्वीकार करेंगे, इसलिए हम सभी को सभ्य नागरिक की तरह व्यवहार करना चाहिए, और जो बात हम ख़ुद के लिए पसंद नहीं करते हैं, वो बात दूसरों के लिए भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।