भोपाल, सितम्बर 2025।

राजधानी भोपाल में हिंदू उत्सव समिति अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर वकील और समाजसेवी आगे आए हैं। सोमवार को अधिवक्ताओं और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और तिवारी की गिरफ्तारी की मांग उठाई।

एफआईआर दर्ज न होने पर नाराजगी
अधिवक्ताओं का कहना है कि तिवारी के बयानों और गतिविधियों ने शहर के शांतिपूर्ण माहौल को नुकसान पहुँचाने का काम किया है। उनका आरोप है कि पुलिस और प्रशासन अब तक उदासीन रवैया अपनाए हुए हैं और एफआईआर दर्ज करने में टालमटोल कर रहे हैं।
 वरिष्ठ अधिवक्ता सैयद साजिद अली ने कहा कि, “एफआईआर तो बहुत पहले दर्ज हो जानी चाहिए थी। शहर की गंगा-जमुनी तहज़ीब को बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई हो।”

मुस्लिम समाज का रुख

मुस्लिम समाज के वरिष्ठ प्रतिनिधि सैयद मोहसिन अली ने भी इस मामले में कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि, “भोपाल हमेशा आपसी भाईचारे और मोहब्बत की मिसाल रहा है। अगर ऐसे बयानों और गतिविधियों को रोका नहीं गया तो सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है। प्रशासन को तुरंत कदम उठाना चाहिए।”

शहर के अन्य मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी यही मांग की है। उनका कहना है कि भोपाल की पहचान उसकी गंगा-जमुनी तहज़ीब से है और अगर प्रशासन ने लापरवाही की तो समाज का भरोसा टूट जाएगा।
स्थानीय निवासी अब्दुल वहीद ने कहा कि, “हम चाहते हैं कि कानून सबके लिए बराबर चले। किसी भी व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जाना चाहिए।”

समाजसेवियों की अपील

समाजसेवियों ने भी प्रशासन से अपील की है कि गंगा-जमुनी तहज़ीब को जिंदा रखने और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए तुरंत कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि दोषियों को कानून के दायरे में लाना आवश्यक है, लेकिन किसी भी समुदाय को गलत तरीके से निशाना बनाना उचित नहीं है।

पुलिस की स्थिति

पुलिस कमिश्नर कार्यालय के बाहर भारी सुरक्षा इंतज़ाम किए गए। प्रदर्शनकारियों को भीतर जाने की अनुमति नहीं दी गई। अभी तक पुलिस अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि चंद्रशेखर तिवारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी या नहीं।

कुल मिलाकर 

भोपाल में इस मुद्दे पर तनाव और राजनीतिक हलचल बनी हुई है। वकीलों, समाजसेवियों और मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों का कहना है कि जब तक गंगा-जमुनी तहज़ीब की हिफाज़त के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक समाज में भरोसा कायम नहीं हो पाएगा। अब सभी की निगाहें पुलिस और प्रशासन के अगले फैसले पर टिकी