भोपाल , 12 जनवरी 2026
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने साजिदा बी और उनके परिजनों द्वारा दायर याचिका का निपटारा करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ की हैं। कोर्ट में राज्य सरकार ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि अब तक याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई भी एफआईआर या आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया है।
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट के सामने आरोप लगाया था कि बिना किसी केस के उनकी रिहायशी प्रॉपर्टी, फ़ार्महाउस, खेत, शादी गार्डन सहित कई जगहों पर कार्रवाई की गई। इसके अलावा उनके बैंक अकाउंट भी फ्रीज़ कर दिए गए और कुछ मीडिया संस्थानों द्वारा लगातार नकारात्मक खबरें चलाई जा रही थीं।
सरकार का बयान: “सिर्फ शक के आधार पर फ्रीज़ हुए थे अकाउंट”
राज्य सरकार के वकील ने कोर्ट में कहा कि बैंक अकाउंट इसलिए फ्रीज़ किए गए क्योंकि कुछ मामलों में संदेह था, लेकिन याचिकाकर्ताओं को किसी भी केस में आरोपी नहीं बनाया गया है।
प्रॉपर्टी टूटने की बात सामने आई
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने बताया कि सरकार ने पहले कोर्ट में भरोसा दिलाया था कि कोई कार्रवाई नहीं होगी, फिर भी उनके कई निर्माण,जैसे मकान, खेत, और अन्य संपत्तियाँ,तोड़ दी गईं।
कोर्ट का आदेश: मुआवज़ा मांगने की छूट
कोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ताओं की संपत्ति बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के गिराई गई है, तो वे उचित फोरम में जाकर कंपेन्सेशन (मुआवज़ा) या अन्य राहत की मांग कर सकते हैं। अधिकारी उनकी अर्जी पर कानून के मुताबिक फैसला करेंगे।
मछली परिवार को मिली बड़ी राहत
साजिदा बी के परिवार को इस मामले में बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब मछली परिवार अपनी संपत्ति के नुकसान के लिए मुआवज़ा प्राप्त करने के अधिकार के साथ आगे बढ़ सकता है। परिवार के वकील ने कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया और कहा कि यह फैसला उनके परिवार के लिए न्याय और सम्मान की जीत है।
आगे की प्रक्रिया
अब मछली परिवार अपने टूटी संपत्तियों के लिए संबंधित सरकारी अधिकारियों के पास आवेदन करके उचित मुआवज़ा मांग सकेंगे। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों को कानून और नियमों के अनुसार याचिकाकर्ताओं की अर्जी पर निर्णय लेना होगा।
इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि बिना केस या एफआईआर के किसी की प्रॉपर्टी तोड़ना कानूनी नहीं है और राज्य सरकार को नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करना होगा।