न्यूज मोहल्ला | जबलपुर, मध्य प्रदेश | सिहोरा

मध्य प्रदेश के जबलपुर ज़िले के सिहोरा क्षेत्र में हाल ही में हुए हिंदू-मुस्लिम विवाद ने प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि इस पूरे मामले में पुलिस ने निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की और गिरफ़्तारियाँ केवल एक पक्ष के लोगों की ही की गईं।

घटना के अनुसार, सिहोरा में मस्जिद के अंदर नमाज़ अदा की जा रही थी। उसी दौरान पास के मंदिर से भजन की आवाज़ अचानक तेज़ कर दी गई, जिस पर मुस्लिम समाज के कुछ लोगों ने आपत्ति जताई। प्रारंभिक स्तर पर मामूली कहासुनी हुई, लेकिन आरोप है कि इसके बाद हिंदू समुदाय के कुछ लोगों द्वारा आगजनी और हमले किए गए। हालात बिगड़ते चले गए और क्षेत्र में तनाव फैल गया।

आंसू गैस मस्जिद के अंदर, बच्चे बेहोश

स्थिति नियंत्रित करने के नाम पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे, जिनमें से कई गोले मस्जिद के अंदर जा गिरे। उस समय मस्जिद के भीतर नमाज़ी मौजूद थे, जिनमें 7–8 साल के बच्चे भी शामिल थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि आंसू गैस के कारण कई लोगों की तबीयत बिगड़ गई और कुछ बच्चे बेहोश हो गए।

नाबालिग और बुज़ुर्ग भी गिरफ़्तार

सबसे गंभीर आरोप यह है कि पुलिस ने गिरफ़्तारी के दौरान उम्र और परिस्थितियों का भी ध्यान नहीं रखा। गिरफ़्तार किए गए लोगों में 12वीं कक्षा में पढ़ने वाला एक नाबालिग छात्र भी शामिल है, जो इस घटना के कारण अपनी परीक्षा तक नहीं दे पाया। इसके अलावा 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुज़ुर्ग और कई नौजवानों को भी जेल भेज दिया गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर पुलिस समय रहते निष्पक्ष तरीके से हस्तक्षेप करती, तो मामला शांत किया जा सकता था। आरोप है कि पुलिस की कार्यवाही ने हालात को संभालने के बजाय और भड़काया, जिसके बाद भीड़ इकट्ठा हुई और हिंसा दोनों पक्षों में फैल गई। इसके बावजूद गिरफ़्तारी केवल एक ही पक्ष से की गई।

ग्राउंड ज़ीरो पर पहुँची APCR टीम

मामले की गंभीरता को देखते हुए APCR (Association for Protection of Civil Rights) की टीम ग्राउंड ज़ीरो पर पहुँची। प्रसिद्ध शख़्सियतों और कानूनी विशेषज्ञों के साथ घटनास्थल का जायज़ा लेने पहुँचे।


ग्राउंड रिपोर्टिंग और कानूनी सहायता के लिए जिन प्रमुख लोगों ने मौके पर पहुँचकर पीड़ितों का साथ दिया, उनमें शामिल हैं:

जावेद अख्तर सेक्रेटरी APCR मध्य प्रदेश
मेहदी हसन सेक्रेटरी APCR जबलपुर
एडवोकेट राजेंद्र गुप्ता, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट जबलपुर
एडवोकेट अमरदीप सिंह सग्गू, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट, जबलपुर
ज़ुबैर इलाही अध्यक्ष APCR भोपाल
डॉ. फरहान आदिल जबलपुर
ग़ुलाम साबिर  जबलपुर



इन सभी ने घटनास्थल का दौरा कर पीड़ित परिवारों से मुलाक़ात की और निर्दोष लोगों को न्याय दिलाने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने का भरोसा दिलाया।

निष्पक्ष जांच की मांग

APCR और स्थानीय नागरिकों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच, दोनों पक्षों की समान कार्रवाई, नाबालिगों और निर्दोषों की तत्काल रिहाई तथा पुलिस की भूमिका की समीक्षा की मांग की है।

फिलहाल सिहोरा में हालात तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताए जा रहे हैं। सवाल यह है कि क्या प्रशासन और पुलिस इस मामले में निष्पक्षता दिखा पाएगी या फिर निर्दोष लोगों को ही इसकी क़ीमत चुकानी पड़ेगी।