भोपाल, 10 जुलाई 2025 -
एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR), मध्यप्रदेश इकाई ने हाल ही में एक गंभीर मुद्दे को लेकर पुलिस प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज की है। संगठन ने आरोप लगाया है कि तीन निर्दोष लोगों के खिलाफ झूठी और नामजद रिपोर्ट दर्ज करवाई गई, जो मात्र पुलिस प्रशासन के दबाव में की गई कार्रवाई का हिस्सा है।
संगठन का कहना है
जब पुलिस जांच में स्पष्ट हुआ है कि इन तीनों लोगों पर लगाए गए आरोप निराधार हैं। इसके बावजूद केवल दबाव और साज़िश के चलते उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया। इस मामले में चंद्र शेखर तिवारी और चरण सिंह कुशवाहा पर बी.एन.एस. (BNS) और आईटी एक्ट की धाराओं तथा एससी-एसटी एक्ट (NSA) के अंतर्गत कार्यवाही की मांग की गई है।
APCR ने जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से निवेदन किया है कि -
इस तरह की झूठी रिपोर्ट दर्ज करने वालों पर सख्त कार्यवाही की जाए।
निर्दोष लोगों को झूठे मामलों में फंसाने से रोका जाए।
न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बरती जाए।
पदाधिकारियों के बयान
अनवर पठान (संयोजक, APCR भोपाल यूनिट) ने बताया,
“हमारा संगठन हर उस नागरिक के साथ खड़ा है जो झूठे मुकदमों का शिकार बनाया जाता है। पुलिस प्रशासन को चाहिए कि वह निष्पक्ष जांच कर न्याय सुनिश्चित करे।”
जुबेर इलाही (जिला अध्यक्ष) का कहना है,
“यह मामला साफ तौर पर साज़िश का परिणाम है। निर्दोष लोगों पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें परेशान करना क़ानून और इंसाफ़ दोनों के खिलाफ है।”
डॉ. फ़ज़ल (जिला उपाध्यक्ष) ने बताया
“हमारी मांग है कि झूठे केस दर्ज करने वालों पर कड़ी कार्यवाही हो और इस तरह के मामलों की पुनरावृत्ति न हो।”
अशरफ अली (जिला सचिव) ने कहा,
“निर्दोषों को झूठे मामलों में फंसाना समाज के लिए खतरनाक प्रवृत्ति है। APCR न्याय और अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा सक्रिय रहेगा।”
सोहैल हाशमी (सदस्य) ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा,
“हम उम्मीद करते हैं कि प्रशासन इस शिकायत को गंभीरता से लेकर निष्पक्ष कार्रवाई करेगा। न्याय में देरी भी अन्याय के बराबर है।”
आम जनता का कहना है
यह मामला सिर्फ तीन व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल उठाता है कि प्रशासनिक दबाव में निर्दोषों को झूठे मामलों में फंसाना कितना बड़ा अन्याय है। ऐसे मामलों पर संगठनों की सक्रिय भूमिका और न्याय की मांग समाज के लिए एक सकारात्मक संकेत है।