जैसा कि आप सभी जानते हैं, न्यूज़ मोहल्ला अपने पाठकों से यह अपील कर चुका है, कि इसके पाठक जिस विषय पर आर्टिकल को कवर करवाना चाहते हैं, तो वो अपने विचार भेजें।

इसी कड़ी में हमारे एक भाई ने एक विषय हमें दिया था, आज उस विषय को कवर करेंगे।

भ्रष्टाचार यह एक ऐसा शब्द है, जो की अक्सर हमको प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से पढ़ने को सुनने को मिलता है, और चुनावी रैलियां में इसका भरपूर इस्तेमाल किया जाता है, और ज़्यादातर राजनेता खुद को भ्रष्टाचार मुक्त और दूसरों को भ्रष्टाचार युक्त साबित करने की हर संभव कोशिश करते हैं।

तो आइए हम जानते हैं, कि भ्रष्टाचार किसको कहते हैं;

भ्रष्टाचार का संधि विच्छेद "भ्रष्ट+आचार" है, जिसका अर्थ है "बिगड़ा हुआ आचरण" या "अनैतिक व्यवहार"। 

भ्रष्टाचार शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है: भ्रष्ट+आचार
भ्रष्ट: इसका अर्थ है, बिगड़ा हुआ, दूषित, या अनैतिक।
आचार: इसका अर्थ है, आचरण, व्यवहार, या चाल-चलन।

तो भ्रष्टाचार का अर्थ है, एक ऐसा आचरण जो नैतिक नियमों, सामाजिक मूल्यों, या कानून का उल्लंघन करता है।

भ्रष्टाचार को अगर हम आम बोलचाल की भाषा में समझने की कोशिश करें, तो हर वह चीज जो जिस पवित्रता के साथ किसी व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए, अगर मिलावट के साथ पहुंचती है, तो इसके पीछे भ्रष्टाचार छुपा हैं।

उदाहरण के लिए एक बच्चे की खुराक दूध है, अगर बच्चों को मिलावट वाला दूध पीने के लिए मिल रहा है, तो यह भ्रष्टाचार है, भ्रष्टाचारी समाज को पूरी तरह से दूषित करते हैं, और लोगों की ज़िंदगियों के साथ खिलवाड़ करते हैं। 

एक और उदाहरण अगर खराब रोड निर्माण है, तो इसके पीछे भ्रष्टाचार छुपा हुआ है। 

अगर एक आम आदमी को उसके अधिकार नहीं मिल पा रहे हैं, तो इसके पीछे भ्रष्टाचार छुपा हुआ है। 

और ऐसा नहीं है, कि भ्रष्टाचार किसी भी विभाग में नहीं पाया जाता है, बल्कि हर विभाग में पाया जाता है, क्योंकि जब जांच एजेंसियों के द्वारा किसी भी विभाग के कर्मचारी या अधिकारी को पकड़ा जाता है, तो उसके पास से जो कुबेर का खज़ाना बरामद होता है, तो उससे यह बात बड़ी आसानी से समझ में आ जाती है, कि भ्रष्टाचार करके इस व्यक्ति ने यह सब इकट्ठा किया है।

भ्रष्टाचार के द्वारा कीमतों को बढ़ाया जाता है, भ्रष्टाचार के द्वारा निम्नस्तरीय निर्माण कार्य किया जाता है, भ्रष्टाचार के द्वारा मिलावट की जाती है, भ्रष्टाचार ज़रूरतमंदों को उनके अधिकारों से वंचित करता है। 

भ्रष्टाचार समाज में अमीरी और गरीबी की खाई को और भी ज़्यादा गहरा करता है, क्योंकि अगर यह ना हो, तो बहुत लोगों तक उनके अधिकार बड़ी आसानी से पहुंच जाए।

इसमें देखने वाली बात यह है, कि ऐसा हरगिज़ नहीं है, कि कोई भी विभाग उसके कर्मचारी या अधिकारियों के इस काले करतूत को नहीं जानता है, लेकिन जब समाज में भ्रष्टाचार शिष्टाचार का रूप धारण कर लेता है, तो सभी उसका हिस्सा बन जाते हैं, इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा, कि ज़िम्मेदार इस कृत्य से गाफ़िल हो, ऐसा नहीं हो सकता हां शामिल ज़रूर होते हैं।

इसके लिए अगर जांच एजेंसियां अपने कर्तव्यों का निर्वहन समय-समय पर करती रहें, तो लोगों के दिल में एक डर बना रहेगा, और भ्रष्टाचार करने से बचेंगे, क्योंकि इसके अंजाम भ्रष्टाचार करने वालों के लिए बेहद भयावह साबित होंगे।

इसके लिए इंग्लिश में एक बड़ी मशहूर कहावत है;

"A fish Rots From The Head Down."

मछली हमेशा अपने सर की तरफ से चढ़ती है, और अगर आला कमान सख्त होता है, तो उस विभाग से जुड़े जितने भी कर्मचारी या अधिकारी होते हैं, वह भी अपने आला कमान की कार्य शैली का पालन करते हैं, और अपने आला कमान के आदेशों का अनुसरण करते हैं।

धन्यवाद।

लेखक इमरान उज़ ज़माँ 
ई-मेल imranuzzaman01@gmail.com