न्यूज मोहल्ला/ नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के वसंतकुंज इलाके से हाल ही में सामने आया एक मामला समाज और शिक्षा व्यवस्था दोनों के लिए गहरे सवाल खड़े कर रहा है। यहां स्थित एक आश्रम के संचालक और स्वयंभू धर्मगुरु स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती उर्फ़ पार्थ सारथी पर 17 छात्राओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िताओं का कहना है कि आश्रम के भीतर उन्हें छेड़छाड़, अश्लील संदेश और शारीरिक उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा।

धारा 164 CrPC के तहत दर्ज हुए बयान

पीड़ित छात्राओं ने न सिर्फ पुलिस से शिकायत की, बल्कि अदालत के समक्ष धारा 164 CrPC के तहत अपने बयान भी दर्ज कराए हैं। इन बयानों के आधार पर दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज किया है। फिलहाल आरोपी बाबा फरार है और उसकी तलाश में पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।

वॉर्डन और स्टाफ की भूमिका पर सवाल

छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया है कि आश्रम की कुछ फैकल्टी और स्टाफ सदस्य उन पर दबाव डालते थे कि वे स्वामी की “मांगें” मान लें। इससे यह साफ होता है कि यह उत्पीड़न किसी एक व्यक्ति का काम नहीं था, बल्कि आश्रम प्रबंधन के भीतर एक संगठित तंत्र सक्रिय था।

वोल्वो कार पर नकली नंबर प्लेट

पुलिस जांच में आश्रम परिसर से एक वोल्वो कार जब्त की गई है, जिस पर फर्जी नंबर प्लेट लगी हुई थी। यह बात मामले की गंभीरता और आरोपी की मंशा पर और गहरे सवाल खड़े करती है।

कौन है स्वामी चैतन्यानंद?

स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती, जिन्हें पार्थ सारथी के नाम से भी जाना जाता है, खुद को “सनातनी संत” और “गुरु” के रूप में प्रस्तुत करता था। उसका दावा था कि वह युवाओं को आध्यात्म और वेदांत की शिक्षा देता है, लेकिन असलियत में उसके खिलाफ लंबे समय से यौन उत्पीड़न और धोखाधड़ी जैसे मामले सामने आते रहे हैं।

यह बाबा अपने आश्रम और संस्थान के माध्यम से युवाओं - खासतौर से छात्राओं - को “धार्मिक शिक्षा” देने का दावा करता था। लेकिन पीड़िताओं के बयानों और मौजूदा केस से साफ है कि धर्म और शिक्षा की आड़ में वह अपनी गंदी हरकतों को अंजाम देता रहा।

विवादों का पुराना इतिहास

यह पहली बार नहीं है जब चैतन्यानंद पर ऐसे आरोप लगे हों। पहले भी उस पर यौन शोषण और वित्तीय गड़बड़ी के मामले दर्ज हो चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि हर बार वह खुद को “संत” और “सनातन धर्म का सेवक” बताकर लोगों को गुमराह करता रहा।

समाज और शिक्षा पर गहरी चोट

यह मामला न केवल धार्मिक संस्थानों की आड़ में चल रहे पाखंड की पोल खोलता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह शिक्षा और आश्रम संस्कृति का दुरुपयोग कर युवतियों की अस्मिता से खिलवाड़ किया जा रहा है।

पुलिस और प्रशासन की चुनौती

फिलहाल पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है, लेकिन बाबा फरार है। सवाल यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद आरोपी अब तक पकड़ से बाहर क्यों है और क्या उसे किसी स्तर पर संरक्षण मिल रहा है?

लेखन: फ़ैजुद्दीन खान, प्रधान संपादक – न्यूज़ मोहल्ला