मंडला, मध्य प्रदेश से वायरल वीडियो में शिक्षक शराब के नशे में बच्चों को पढ़ाते नजर आए। यह घटना शिक्षा व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
मध्य प्रदेश के मंडला जिले से हाल ही में सामने आया एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक सरकारी स्कूल का शिक्षक शराब के नशे में बच्चों को पढ़ाते हुए नजर आ रहा है। हैरानी की बात यह है कि शिक्षक पाठ्य-पुस्तकों की जगह फिल्मी गाने और शायरी बच्चों को पढ़ा रहे हैं। यह वीडियो न सिर्फ शिक्षा के स्तर पर चिंता पैदा कर रहा है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और स्कूल की जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
यह घटना अकेली नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं:
कटनी में एक शिक्षक ने कथित रूप से बच्चों को शराब परोसने का प्रयास किया।
धर जिले में एक महिला शिक्षक नशे में स्कूल पहुंची और अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगा।
सिंगरौली और मऊगंज में शिक्षक शराब के नशे में कक्षा में पढ़ाते पाए गए।
दिंडोरी में 11 शिक्षक नियमित रूप से नशे की हालत में पढ़ाई कर रहे थे।
ये सभी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि शराब के नशे में शिक्षकों का अनुशासनहीन व्यवहार, बच्चों के साथ अनुचित बर्ताव और शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर असर डाल सकता है।
सिर्फ स्कूल तक ही नहीं, शराब के नशे में कई अन्य सामाजिक अपराध और हादसे भी होते रहे हैं। सड़कों पर दुर्घटनाएं, सार्वजनिक हिंसा, घरेलू हिंसा और महिलाओं या बच्चों के खिलाफ अपराधों में नशे की भूमिका अक्सर सामने आती रही है। ऐसे मामलों में बच्चों की सुरक्षा और समाज में अनुशासन की चिंता और बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा संस्थानों में नशे का यह असर भविष्य की पीढ़ी के लिए खतरा बन सकता है। शिक्षा विभाग और सरकार को ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि न सिर्फ बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता भी बनी रहे।
लब्बोलुआब:
मध्य प्रदेश की हालिया घटना और पूर्व के मामले यह संकेत देते हैं कि शिक्षकों का नशे में होना केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि शिक्षा और समाज के लिए गंभीर चुनौती है। बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए सख्त निगरानी, नियम और जिम्मेदारी जरूरी है।