अब शहरों में सड़के और फुटपाथ भी महफूज नहीं है, अब सड़क पर या फुटपाथ पर चलने वालों को या गाड़ी चलाने वालों को जान जोखिम में डालकर चलना पड़ रहा है, क्योंकि बड़ी-बड़ी तेज रफ्तार गाड़ियां, जो कि बहुत हैवी सीसी होती हैं, जिनकी स्पीड बहुत ज़्यादा होती है, वह बेलगाम होकर किसी भी व्यक्ति से भी टकरा जाती है।
तेज़ रफ़्तार गाड़ी चलाने वालों को यह समझना चाहिए, कि उनकी या दूसरों की ज़िंदगी इतनी सस्ती नहीं है, कि अपनी जान को सड़क पर ज़ाया कर दिया जाए, और रोड्स रेस कोर्स नहीं है, जहां पर हम गाड़ी की अधिकतम स्पीड को चेक करें, क्योंकि रश ड्राइविंग करने वाले लोग कभी भी फटने वाला एक बम बनकर घूम रहे हैं, जो कभी भी फटकर खुद की जान को तो जोखिम में डाल ही रहा है, और दूसरों की जान को भी जोखिम में डाल रहा है, क्योंकि हमारे यहां एक कहावत बड़ी ही मशहूर है की गाड़ी और घोड़े किसी के भी सगे नहीं होते।
इस संबंध हमारी जो अपील है, वह यही है;
की माता-पिता अपने सुपुत्रों को यह सुपुत्रियों को हैवी बाइक या कर दिलवाते समय इस बात का जरूर ध्यान रखें कि उनको इस गाड़ी को चलाने का तरीका जरूर सिखाएं क्योंकि अगर उनको साधन दे दिया गया और उनको सही इस्तेमाल करना नहीं आया तो यह है, तुझे गाड़ी चलाने वालों के लिए बेहद हानिकारक सिद्ध होता है और माता-पिता को भी या तो अपनी औलाद को खोना पड़ता है या सड़क हादसों में हुए एक्सीडेंट्स की वजह से औलाद जीवन भर के लिए अपाहिज हो जाती है।
इस संबंध में हर माता-पिता अगर अपनी औलाद को संवेदनशील करें, तो इसका असर समाज पर बहुत गहरा होगा, फिर इसके बाद दूसरे नंबर पर आते हैं दोस्त, क्योंकि हर इंसान को अच्छा या बुरा बनने वाले उसके दोस्त ही होते हैं, क्योंकि हर इंसान अपने दोस्त के एक्शंस को फॉलो करता है, तो जब माता-पिता के द्वारा अपने बच्चों को यह सिखाया जाएगा, कि गाड़ी किस तरह से चलाना चाहिए, तो वह खुद भी सीखेंगे और अपने दोस्तों को भी जो तेज रफ्तार गाड़ी चलाते हैं, उनको भी जरूर सिखाएंगे, कि गाड़ी एक उचित स्पीड पर ही चलाना चाहिए, इससे हम भी सुरक्षित रहेंगे, और हमारे द्वारा दूसरे भी सुरक्षित रहेंगे।
यातायात विभाग से यह गुजारिश है कि वह अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें क्योंकि उनका अधिकतर समय सिर्फ ठीक चलने वालों को रोक कर कागज देखने में और चालानी कार्रवाई या बिना चालानी कार्रवाई के बिना पेपर वर्क के सेटलमेंट में गुजर जाता है जिसको हम अच्छी तरह जानते हैं क्योंकि ऐसा हो नहीं सकता कि कोई भी भाग अगर चीजों को सुधारना चाहे तो वह चीजों में सुधार न कर सके और अगर ऐसा हो रहा है तो वह विभाग और उसमें मौजूद कर्मचारी जिस चीज की तनख्वाह ले रहे हैं उसका हक अदा नहीं कर पा रहे हैं।
इसके साथ ही आखरी बात, कि अक्सर ऐसा देखने में आ रहा है, कि फोर व्हीलर गाड़ियों में काफी हार्ड म्यूजिक हाई वॉल्यूम के साथ बजाया जाता है, शायद इस लाऊड म्यूजिक का भी नकारात्मक असर गाड़ी चलाने वाले के ऊपर पड़ता है, क्योंकि जब भी फोर व्हीलर का एक्सीडेंट होता है तो उसकी वीडियो ग्राफी लॉक करते हैं क्योंकि आजकल दिखावे का जमाना है तो लोग हर अच्छी बुरी बात को पूरी दुनिया को दिखाना चाहते हैं तो जब एक्सीडेंट होता है तो उसके स्पीडोमीटर पर जो स्पीड दिखती है वह 100 से भी काफी ऊपर होती है और म्यूजिक भी बहुत तेज बज रहा होता है, इस अत्यंत लाउड म्यूजिक और तेज रफ्तार की वजह से गाड़ी सवार आक्रामक होता है और अपनी आक्रामकता को स्पीडोमीटर को अधिकतम स्पीड पर पहुंचकर शांत करता है।
लेखक इमरान उज़ ज़माँ
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