न्यूज मोहल्ला/ जबलपुर मध्यप्रदेश |जबलपुर के गाजी बाग़ ग्राउंड में जबलपुर-कटनी जिले का दो दिवसीय वार्षिक इज्तेमा धार्मिक माहौल में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस इज्तेमा में जबलपुर और कटनी के अलावा आसपास के जिलों से हजारों की संख्या में उलेमा-ए-कराम, बुजुर्गान और आम मुसलमानों ने शिरकत की।
दो दिनों तक चले इस धार्मिक समागम में ईमान की इस्लाह (सुधार), अमल की पाबंदी, सुन्नत पर चलने की अहमियत और दीन की दावत जैसे विषयों पर विस्तृत बयानात पेश किए गए।
पहले दिन का बयान: सुन्नत की पाबंदी पर जोर
पहले दिन मुफ्ती सलमान क़ासमी साहब ने अपने बयान में सुन्नत के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि “पैगंबर-ए-करीम का हर अमल और हर बात उम्मत के लिए मार्गदर्शन है।” उन्होंने मुसलमानों को सामूहिक इस्लाह, सब्र और इस्तिक़ामत की राह पर चलने की प्रेरणा दी।
दूसरे दिन की नसीहत: अच्छे अख़्लाक की अहमियत
दूसरे दिन नमाज़-ए-अस्र के बाद नागपुर से पधारे इफ्तिखार साहब ने अख़्लाक-ए-हसीना (अच्छे चरित्र) की अहमियत पर बयान देते हुए कहा कि “एक अच्छा मुसलमान अपने व्यवहार से ही दीन की दावत को दुनिया तक पहुँचा सकता है।” उन्होंने कहा कि इस्लाम की खूबसूरती को अपने आचरण से पेश करना सबसे बड़ा अमल है।
समापन सत्र: कयामत की तैयारी और दावत की जिम्मेदारी
इज्तेमा के समापन सत्र में भोपाल से आए मौलाना ज़कारिया हफ़ीज़ साहब ने नमाज़-ए-मगरिब के बाद दिल को छू लेने वाला बयान पेश किया। उन्होंने कहा कि “दुनिया की हर चीज़ फानी है, असली कामयाबी आखिरत की तैयारी में है।”
उन्होंने अपने बयान में तीन प्रमुख बातों पर जोर दिया:
दीन की समझ (फिक्र) पैदा करना,
अमल की पाबंदी पर ध्यान देना,
दावत और तबलीग के फर्ज को निभाना।
मौलाना ज़कारिया साहब ने खास तौर पर युवाओं से अपील की कि वे अपने मोहल्लों, गांवों और कस्बों में दीन का पैगाम पहुंचाने के लिए वक्त निकालें।
सामूहिक दुआ में अमन, भाईचारे और तरक्की की फरियाद
इज्तेमा का समापन सामूहिक दुआ के साथ हुआ, जिसमें मुल्क की सलामती, उम्मत की एकता, गुनाहों की माफी और दीन पर इस्तिक़ामत की दुआ की गई।
इज्तेमा के बाद विभिन्न जमातें आसपास के इलाकों की ओर रवाना हुईं ताकि दीन की दावत का सिलसिला जारी रखा जा सके।
सभी प्रतिभागियों ने अल्लाह तआला से दुआ की कि वह इस इज्तेमा को कबूल करे और पूरी उम्मत को कुरआन और सुन्नत के रास्ते पर चलने की तौफीक अता करे।