जैसा कि आप सभी जानते हैं, न्यूज़ मोहल्ला आपके सामने उन मुद्दों को लेकर हाज़िर है, जिनके बारे में आपको जानकारी होना ज़रूरी है, क्योंकि हमारे द्वारा कवर किए गए मुद्दे समाज से जुड़े हुए होते हैं, जिनको समाज की बेहतरी के लिए कवर किया जाता है।

इसीलिए हम आज आपसे बच्चियों और बच्चों पर बढ़ते यौन अपराध के बारे में करेंगे।

तो सबसे पहले हम जानते हैं, कि यौन अपराध किसको कहते हैं;-


कानूनी आधार पर अगर 16 साल से कम उम्र के बच्चे को यौन उद्देश्य से छूना अपराध है, किसी वस्तु का उपयोग करके बच्चे को यौन रूप से छूना भी अपराध है, कोई व्यक्ति जो 16 साल से कम उम्र के बच्चे को किसी व्यक्ति को छूने, खुद को छूने या किसी अन्य व्यक्ति को छूने के लिए कहता है, वह यौन स्पर्श को आमंत्रित करने का अपराध करता है।

जब भी हम पेपर पढ़ते हैं, तो इस तरह की खबरें अब लगातार हमारे पढ़ने में आती हैं, और प्रिंट प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से भी हमें पता चलता है, कि बच्चों पर यौन अपराध बढ़ता जा रहा है।

जब से हमारे समाज में मोबाइल डाटा सस्ता हुआ है, और ज़्यादातर लोगों के पास स्मार्टफोन आ चुका है, और इंटरनेट का इस्तेमाल करने के लिए दूसरे माध्यम भी आ चुके हैं,  तब से पॉर्न एडिक्शन भी बढ़ा है, इसलिए अगर हम देखें, तो हमारे समाज में औरतों पर, लड़कियों पर, और बच्चियों पर बलात्कार के छेड़छाड़ के उत्पीड़न के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं, बल्कि अब तो कम उम्र लड़के भी सुरक्षित नहीं है, उनको भी यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।

क्योंकि पॉर्न एडिक्ट व्यक्ति उसकी शारीरिक ज़रूरत को पूरा करने के लिए मौके की तलाश में रहता है, और उसको मौका मिलते ही वह यौन अपराध को अंजाम दे देता है, फिर मानसिक रूप से यह विकृत व्यक्ति ये नहीं देखता, कि उसका शिकार एक बुड्ढी औरत, अधेड़ औरत, जवान औरत, या मासूम बच्ची भी हो सकती है।

इन्हीं सब मुद्दों को कवर करते हुए हम यहां पर बिहार में रहने वाली एक आठवीं क्लास की बहादुर लड़की की बात करेंगे, जो ऑटो से स्कूल जाती थी, और ऑटो वाले ने जब ऑटो में ही इस लड़की से छेड़खानी करनी चाही, तब इस बहादुर लड़की ने डरे बिना, उस दरिंदे का डटकर सामना किया, उसने निडरता के साथ बैग में से कम्पोक्स बॉक्स निकाल कर, ऑटो वाले को मारा और फिर चलती ऑटो में से कूद गई, उसके साथ ही इस बहादुर लड़की ने उसके घर वालों को जाकर, इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी, फिर घर वालों ने पुलिस थाने में जाकर FIR दर्ज करवाई, और वह दरिंदा जोकि इस कम उम्र लड़की के साथ ज़्यादती कर सकता था, उसको गिरफ्तार किया गया।

काश की हमारे समाज में लड़के और लड़कियां इतने ही बहादुर हो जाएं, कि वह इस तरह के दरिंदो का निडरता के साथ सामना कर सकें, ताकि हमारे समाज में जो बच्चों और बच्चियों के साथ यौन अपराध किया जा रहे हैं, उन पर लगाम लगाई जा सके।

मुझे इस बात की पूरी उम्मीद है, कि इस बहादुर बच्ची के घर वालों ने, इस लड़की को समाज में मौजूद दरिंदों और उनके द्वारा किए जा रहे, यौन अपराधों के संबंध में जागरूक ज़रूर किया होगा, और हर तरह की अप्रिय स्थिति में संतुलन नहीं खोकर होश से काम लेकर उस स्थिति से निकलने का बारे में ज़रूर समझाया होगा, क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता, तो अक्सर बच्चे अप्रिय स्थिति में डर और सहम जाते हैं, और इस तरह के दरिंदो का आसानी से शिकार बन जाते हैं।

इसलिए हम अपने चैनल के माध्यम से माता और पिता से यह अनुरोध करते हैं, कि आप लोग घर में इस तरह का माहौल बनाएं, जहां बच्चों से यौन अपराधों पर बात की जाए और उनको इस संबंध में उचित शिक्षा दी जाए।

घरों में उन्हें गुड टच और बेड टच के बारे में बताया जाए, ताकि अगर उनके साथ कुछ इस तरह की अप्रिय स्थिति पेश आए, तो वह मेंटली तौर पर तैयार रहे, और उनके साथ कोई इस बुरे काम का करता है, तो उसका विरोध करें।

इसके साथ ही माता और पिता को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए, कि अगर उनका बच्चा या बच्ची गुमसुम रह रहे है, तो उसकी वजह क्या है? 

हमें अपने बच्चों का अच्छा दोस्त बनकर, उनकी काउंसलिंग करना चाहिए, ताकि उनके साथ अगर कुछ गलत हो रहा है, तो वह बता पाए, क्योंकि माता और पिता से अच्छा कोई दोस्त इस सारी दुनिया में नहीं होता है, लेकिन पहले हमें उनका दोस्त बनना पड़ेगा, अगर हम यह मान लेंगे, कि हम माता-पिता हैं, और हमारे बच्चे सारी बातें हमें खुद आकर बताएं, तो यह हमारी सरासर गलती है, बल्कि एक बहुत बड़ी भूल है।

जो बच्चे स्कूल जाते हैं, उनके साथ ऐसा देखने में आता है, कि जो उनको लेकर स्कूल लेकर जाते हैं, वही ड्राइवर और कंडक्टर इनके साथ यौन छेड़छाड़ और मौका मिलते ही यौन अपराध करते हैं, या फिर मोहल्ले में से कोई व्यक्ति या कुछ करीबी रिश्तेदार।

इसलिए हम सभी पेरेंट्स को अपने बच्चों के व्यवहार पर नज़र रखना और ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि अगर हमारे बच्चे के साथ कुछ गलत हो रहा है, और अगर वह डरा और सहमा रहता है, तो हमें यह फौरन समझ लेना चाहिए, कि उसके साथ कुछ ना कुछ गलत हो रहा है, इस वजह से हमारा बच्चा परेशान है, लेकिन वो हमसे अपनी परेशानी बता नहीं पा रहा है।

जो बच्चे स्कूल जाते हैं, उनके माता और पिता को व्हाट्स ऐप पर एक ग्रुप बनाना चाहिए, जहां पर इस तरह की बातों को करना चाहिए, और बच्चों को बहादुर बनाना चाहिए, जैसे बिहार की एक बहादुर लड़की ने हिम्मत और हौसले से एक दरिंदे का डटकर सामना किया है, इस तरह के उदाहरण बच्चों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होते हैं, क्योंकि बच्चों के दिल में बहुत जल्दी हिम्मत आती है, और वो बहुत जल्दी कमज़ोर भी पड़ जाते हैं, यह उनके व्यवहार की खासियत होती है, क्योंकि जैसे माहौल में वह रहते हैं, वैसे ही बन जाते हैं।

इस संबंध में स्कूलस एडमिनिस्ट्रेशन को भी ड्राइवर और कंडक्टर का अपॉइंटमेंट करते समय, इस बात का ध्यान रखना चाहिए, कि ड्राइवर और कंडक्टर के बारे में संपूर्ण जानकारी एकत्रित करें, क्योंकि यह बच्चों की ज़िंदगी का मामला है, इसलिए शरीफ और ईमानदार ड्राइवर और कंडक्टर का सिलेक्शन करना चाहिए, और हमें ये देखना चाहिए, कि वो लोग कहीं सामाजिक बुराइयों में लिप्त तो नहीं है, क्योंकि ऐसे लोगों के साथ बच्चों को स्कूल भेजना बेहद खतरनाक साबित होता है।

अंत में मैं सिर्फ इतना कहकर अपनी बात को खत्म करना चाहूंगा, हमको यह जानकर सख़्त हैरानी होगी, कि हमारे समाज में जो पॉलीटिशियंस हैं, उन पर भी औरतों के ऊपर किए गए कई अपराध दर्ज हैं, कि अक्सर सभी पार्टियों के राजनेता सभी तरह की अपराधिक गतिविधियों में लिप्त होते हैं, और उन पर संगीन अपराध दर्ज हैं। 

जब मैंने बच्चों पर यौन अपराध के संबंध में आर्टिकल लिखने का सोचा, तो इस पर बात भी नज़र डाली, कि इस संबंध में राजनेताओं की अपराधिक स्थिति क्या है, तो बीबीसी न्यूज़ के मुताबिक मौजूदा सांसदों और विधायकों में से 151 के ऊपर महिला उत्पीड़न के मामले दर्ज हैं, जो कि भारत की सभी मुख्य राजनीतिक पार्टियों से संबंध रखते हैं। 

इसलिए हम इस बात का अंदाज़ा लगा सकते हैं, कि जब राजनेता जो की जनता की रक्षा के लिए जनता द्वारा चुने हैं, जब वही लोग जनता की जान और माल, इज़्ज़त और आबरू के भक्षक बन जाएंगे, तब जो आम नागरिक हैं, उनको भी समाज में मौजूद हर कमज़ोर व्यक्ति के ऊपर दुस्साहस करने का साहस आ जाएगा।

और ऐसा अक्सर कहा जाता है, कि राजनेताओं के द्वारा किए गए अपराध पर उनको सज़ा नहीं दी जा सकती है, और वह चाहे कितने भी अपराध कर लें, लेकिन वह कानून के लूप होल्स का सहारा लेकर, किसी न किसी तरीके से खुद के द्वारा किए गए अपराधों को सिद्ध हो जाने के बाद भी बचा लेते हैं।

इसलिए अगर सरकारे चाहती हैं, कि देश में अपराध कम हो, तो उन्हें जनता के द्वारा चुने हुए राजनेताओं को, जोकि आपराधिक गतिविधियों में लिप्त हैं, और जिन पर कैसेस चल रहे हैं, तत्काल प्रभाव से फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई करना चाहिए, और इन राजनेताओं का अपराध सिद्ध होने पर जल्द से जल्द सख़्त सज़ा दी जानी चाहिए। 

ताकि समाज में मौजूद जो बुरे लोग हैं, जो इंसानियत को नुकसान पहुंचाते हैं, उनको एक सबक मिल सके, और ये लोग भी अपने अंजाम से डर सके, क्योंकि कानून का डर लोगों के दिल में से निकलता जा रहा है, यही वजह है, कि छोटे बच्चियों पर भी अब बलात्कार और यौन अपराध बढ़ते जा रहे हैं।


लेखक इमरान उज़ ज़माँ 
ई-मेल imranuzzaman01@gmail.com