तेहरान / दुनिया: ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) संयुक्त अमेरिकी और इज़राइली हवाई हमलों में शहीद (मारे गए) होने की ईरानी सरकारी मीडिया तथा आधिकारिक सूत्रों ने पुष्टि कर दी है। 

यह हमला सटीक और बड़े पैमाने पर संचालित एक सैन्य अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसमें कई वरिष्ठ सैन्य और सरकारी अधिकारी भी मारे गए। 


क्या हुआ?

 हमला कब और कैसे हुआ:
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार खामेनेई उस समय एक बैठक में शामिल थे, जब उनके कार्यालय के पास लक्षित हमले किए गए। 

हमले का हितधारक:
अमेरिका और इज़राइल दोनों के संयुक्त ऑपरेशन के रूप में यह हमला किया गया। 

 परिवार को भी नुकसान:
रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि इस भीषण हमले में खामेनेई की बेटी, दामाद और पोती भी शहीद हुईं। 


आधिकारिक पुष्टि और शोक

ईरान के सरकारी टीवी और मीडिया ने खामेनेई की मौत की पुष्टि की और देश भर में 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक तथा 7 दिनों का सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। 

राज्य-प्रायोजित मीडिया पर खबर पढ़ते समय एक टीवी एंकर भी भावुक होकर रो पड़े, जिससे देश भर में गहरा मातम देखने को मिला। 


आलोचना, समर्थन और प्रतिक्रियाएँ

 ईरान और उसके समर्थक:
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) समेत कई समर्थक समूहों ने खामेनेई को “एक महान नेता” बताया है जिनकी शहादत को धर्म और साहस के रूप में याद किया जाएगा। 

 दुनिया भर में प्रतिक्रियाएँ:
खामेनेई की मौत पर एशिया के कई हिस्सों में, विशेषकर मुस्लिम-बहुल इलाकों में विरोध और समर्थन दोनों ही भावनाएँ तेज़ी से सामने आई हैं। 


राजनीतिक और वैश्विक प्रभाव

खामेनेई का 36 वर्षों से अधिक काल तक शासन करना:
1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता रहे खामेनेई ने देश की विदेश नीति, खासकर पश्चिम के साथ तनावपूर्ण संबंधों को नियंत्रित किया। उनकी शहादत से अब ईरान में सत्ता संक्रमण और नेतृत्व का नया दौर शुरू होने वाला है। 

 क्षेत्रीय तनाव:
मध्य-पूर्व में पहले से ही जारी तनाव और संघर्ष अब और तीव्र होने की आशंका जताई जा रही है।

• वैश्विक कूटनीति:
संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संस्थाएँ संघर्ष को देखते हुए बातचीत और शांति की अपील कर रही हैं।

 लब्बोलुआब 

आयतुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु की पुष्टि ईरानी सरकारी मीडिया द्वारा की गई है, और देश में 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक का ऐलान हो चुका है। यह घटना मध्य-पूर्व और अंतरराष्ट्रीय राजनीति दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ है, जिसका प्रभाव आने वाले दिनों में और स्पष्ट होगा।